अत्यधिक गर्मी भारत की वृद्धि और रोज़गार के लिए खतरा: विश्व बैंक
अत्यधिक गर्मी भारत की आर्थिक वृद्धि और रोज़गार के लिए संरचनात्मक खतरा बनकर उभर रही है, विश्व बैंक ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा। गर्मी के कारण 2024 में देश को अनुमानित 247 अरब संभावित श्रम घंटे और 194 अरब डॉलर की संभावित आय का नुकसान हुआ, जिसमें खोए श्रम घंटों में कृषि की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और निर्माण क्षेत्र की 20 प्रतिशत रही। पर्याप्त अनुकूलन उपायों के बिना 2050 तक दक्षिण एशिया की जीडीपी लगभग 7 प्रतिशत कम रह सकती है।
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Heat exposure cost India 247 billion potential labour hours and $194 billion in potential income in 2024. — Figure appears in source, attributed to the World Bank report 'A Livable Future'.
- South Asia's GDP could be nearly 7% lower by 2050 without adequate adaptation. — Attributed to the same World Bank report; projection, not a measured outcome.
- A single five-day heatwave in India is associated with around 30,000 excess deaths. — Presented in source as a World Bank report estimate; source itself notes it exceeds officially recorded heatstroke deaths.
- India electricity demand hit a record 156 billion units in May 2024, up 15% year-on-year; AC sales rose about 34% between 2023 and 2024. — Figures appear in source, attributed to the report; AC sales described as an estimate.
- Heat early warning systems in Indian cities return roughly $50 for every $1 spent. — Direct quote from the report's cost-benefit analysis, attributed.
विश्लेषकों की राय राय
विश्व बैंक की रिपोर्ट गर्मी को मौसम की समस्या से हटाकर उत्पादकता की समस्या के रूप में सामने रखती है। 2024 में 24,700 करोड़ संभावित श्रम घंटे और 194 अरब डॉलर की संभावित आय का नुकसान हुआ, जिसका बड़ा हिस्सा कृषि (66 प्रतिशत) और निर्माण (20 प्रतिशत) पर पड़ा — यानी यह नुकसान जीडीपी के आंकड़ों में दिखने से पहले गरीब परिवारों की रोज़ की कमाई में दिखता है। दूसरी ओर रिपोर्ट एक अवसर भी गिनाती है: 2040 तक टिकाऊ कूलिंग में 1.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश अवसर और करीब 37 लाख नौकरियों की संभावना।
- खोए हुए श्रम घंटों का 86 प्रतिशत खेती और निर्माण में केंद्रित होना बताता है कि मज़दूरी का नुकसान मुख्य रूप से उन असंगठित कामगारों पर पड़ता है जिनके पास आय का कोई सुरक्षा कवच नहीं है।
- दिल्ली के रेहड़ी-पटरी वालों का सर्वे — 90 प्रतिशत ने काम के घंटे घटाए, 72 प्रतिशत का माल गर्मी से खराब हुआ — आय और कार्यशील पूंजी, दोनों पर दोहरी चोट दिखाता है।
- मई 2024 में 156 अरब यूनिट की रिकॉर्ड बिजली मांग और एसी बिक्री में 34 प्रतिशत उछाल संकेत देते हैं कि कूलिंग अब परिवारों और ग्रिड, दोनों के लिए स्थायी नया खर्च बन रही है।
- 40 डिग्री से ऊपर बिजली कटौती की बढ़ती आवृत्ति और अवधि, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे को नुकसान और विमानों पर संभावित लोड पाबंदी — ये सब कारोबार की परिचालन लागत और निवेश जोखिम बढ़ाते हैं।
- गर्मी की पूर्व चेतावनी प्रणालियों पर खर्च हर एक डॉलर पर लगभग 50 डॉलर के प्रतिफल का अनुमान इस सस्ते रास्ते को मज़बूत करता है कि नई योजनाओं के बजाय मौजूदा योजनाओं में ही हीट-रेज़िलिएंस जोड़ा जाए।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि हीटवेव को अधिसूचित आपदा का दर्जा मिलता है या नहीं और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में पैसिव कूलिंग मानक जुड़ते हैं या नहीं — ये दो फैसले राहत कोष और आगे की निर्माण लागत, दोनों तय करेंगे।
ये विश्व बैंक के अनुमान और मॉडल-आधारित प्रक्षेपण हैं, तय नतीजे नहीं; 2050 तक लगभग 7 प्रतिशत जीडीपी नुकसान और 37 लाख नौकरियों के आंकड़े शर्तों पर निर्भर परिदृश्य हैं, और यह खबर यह नहीं बताती कि सरकार असल में क्या कदम उठाएगी।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 8 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
विश्व बैंक ने शुक्रवार को 'A Livable Future: Protecting Jobs and Growth from Extreme Heat in South Asia's Cities' शीर्षक रिपोर्ट जारी की, जिसमें अत्यधिक गर्मी को भारत की आर्थिक वृद्धि और रोज़गार के लिए एक संरचनात्मक (structural) खतरा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बढ़ते तापमान से श्रम उत्पादकता, बुनियादी ढाँचा और शहरीकरण प्रभावित होंगे, जब तक अनुकूलन (adaptation) उपाय तेज़ नहीं किए जाते। सबसे अधिक असर गरीबों, अनौपचारिक बस्तियों के निवासियों, निर्माण मज़दूरों और सड़क विक्रेताओं पर पड़ता है, जहाँ शहरी ताप द्वीप (UHI) प्रभाव गर्मी को और बढ़ा देता है।
मुख्य तथ्य
- 2024 में गर्मी के कारण भारत को अनुमानित 247 अरब संभावित श्रम घंटे और 194 अरब डॉलर की संभावित आय का नुकसान हुआ।
- खोए श्रम घंटों में कृषि की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत और निर्माण क्षेत्र की 20 प्रतिशत रही।
- पर्याप्त अनुकूलन के बिना 2050 तक दक्षिण एशिया की जीडीपी लगभग 7 प्रतिशत कम रह सकती है; 2050 तक क्षेत्र में करीब 28 करोड़ कामकाजी उम्र के लोग जुड़ेंगे।
- कम उत्पादकता के कारण अत्यधिक गर्मी से क्षेत्र को हर साल 3.1 करोड़ पूर्णकालिक नौकरियों के बराबर नुकसान हो रहा है।
- मई 2024 में बिजली मांग रिकॉर्ड 156 अरब यूनिट पहुँची, जो साल भर पहले से 15 प्रतिशत अधिक; 2023 से 2024 के बीच एसी बिक्री में अनुमानित 34 प्रतिशत वृद्धि।
- 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान पर बिजली कटौती की आवृत्ति 20-50 प्रतिशत और अवधि 15-60 प्रतिशत बढ़ जाती है।
- भारत में एक पाँच-दिवसीय लू (हीटवेव) से लगभग 30,000 अतिरिक्त मौतें जुड़ी पाई गईं।
- 2040 तक भारत में सतत कूलिंग में 1.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश अवसर; सस्ते कूलिंग उपकरणों के घरेलू विनिर्माण से करीब 37 लाख नौकरियाँ बन सकती हैं।
समयरेखा
- मई 2024भारत की बिजली मांग रिकॉर्ड 156 अरब यूनिट पर पहुँची, एक साल पहले से 15 प्रतिशत अधिक।
- 2023 से 2024एयर-कंडीशनर बिक्री में अनुमानित 34 प्रतिशत वृद्धि।
- 2024गर्मी के कारण 247 अरब संभावित श्रम घंटे और 194 अरब डॉलर संभावित आय का नुकसान।
- 2025दिल्ली के सड़क विक्रेताओं पर सर्वेक्षण: 90 प्रतिशत ने गर्मी के कारण कार्य-घंटे घटाए, 72 प्रतिशत को खराब हुए स्टॉक से नुकसान।
- शुक्रवार (रिपोर्ट जारी)विश्व बैंक की रिपोर्ट 'A Livable Future: Protecting Jobs and Growth from Extreme Heat in South Asia's Cities' प्रकाशित।
- 2030 तकदिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तापमान हर साल कई दिन 50 डिग्री सेल्सियस तक या उससे अधिक पहुँच सकता है।
- 2040 तकसतत कूलिंग में 1.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश अवसर और करीब 37 लाख नौकरियों की संभावना।
- 2050 तकदक्षिण एशिया में ~28 करोड़ कामकाजी उम्र के लोग जुड़ेंगे; जीडीपी लगभग 7 प्रतिशत कम रह सकती है।
किसका दाँव
- कृषि और निर्माण क्षेत्र के मज़दूर — खोए श्रम घंटों में इनका 66 प्रतिशत और 20 प्रतिशत हिस्सा; खुले में काम करने से आय और स्वास्थ्य पर सीधा असर।
- सड़क विक्रेता (दिल्ली सर्वेक्षण, 2025) — 90 प्रतिशत ने कार्य-घंटे घटाए, 72 प्रतिशत को गर्मी से खराब हुए माल का नुकसान।
- विश्व बैंक — रिपोर्ट के ज़रिये ताप-लचीलापन (heat resilience) को मौजूदा सरकारी कार्यक्रमों में शामिल करने की सिफ़ारिश।
- बिजली क्षेत्र और वितरण कंपनियाँ — रिकॉर्ड मांग और 40 डिग्री से ऊपर तापमान पर बिजली कटौती की आवृत्ति व अवधि बढ़ना।
- शहरी स्थानीय निकाय व उपराष्ट्रीय (subnational) प्राधिकरण — ताप पूर्व चेतावनी प्रणाली व तैयारी मज़बूत करना; प्रत्येक 1 डॉलर खर्च पर लगभग 50 डॉलर का प्रतिफल।
- परिवहन व विमानन बुनियादी ढाँचा — मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे को गर्मी से नुकसान; हवाई अड्डों पर अत्यधिक तापमान से टेक-ऑफ में यात्री/कार्गो भार घटाने की मजबूरी।
- अनौपचारिक बस्तियों के गरीब निवासी — छाया और हरित आवरण की कमी तथा UHI प्रभाव के कारण सर्वाधिक जोखिम।
क्यों अहम है
भारत की वृद्धि और रोज़गार का बड़ा हिस्सा खुले में काम करने वाले कृषि, निर्माण और अनौपचारिक क्षेत्रों पर टिका है, जिन पर गर्मी का असर सीधे उत्पादकता और आय में दिखता है। रिपोर्ट के अनुसार अनुकूलन के बिना 2050 तक दक्षिण एशिया की जीडीपी लगभग 7 प्रतिशत कम रह सकती है, जबकि गर्मी बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता, परिवहन ढाँचे और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी दबाव डाल रही है। दूसरी ओर, सतत कूलिंग में 1.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश अवसर और 37 लाख नौकरियों की संभावना इसे जोखिम के साथ-साथ आर्थिक अवसर भी बनाती है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- विश्व बैंक रिपोर्ट का नाम: 'A Livable Future: Protecting Jobs and Growth from Extreme Heat in South Asia's Cities'।
- 2024 में भारत को गर्मी से 247 अरब संभावित श्रम घंटे और 194 अरब डॉलर संभावित आय का नुकसान।
- शहरी ताप द्वीप (Urban Heat Island) प्रभाव घनी बसी शहरी बस्तियों में तापमान को और बढ़ाता है।
- सिफ़ारिश: प्रधानमंत्री आवास योजना में पैसिव कूलिंग उपाय जोड़ना और लू (हीटवेव) को अधिसूचित आपदा के रूप में मान्यता देना।
- ताप पूर्व चेतावनी प्रणाली पर खर्च किए प्रत्येक 1 डॉलर पर लगभग 50 डॉलर का प्रतिफल (विश्व बैंक लागत-लाभ विश्लेषण)।
- मई 2024 में बिजली मांग 156 अरब यूनिट का रिकॉर्ड, सालाना 15 प्रतिशत वृद्धि।
मेन्स दृष्टिकोण
विश्व बैंक की रिपोर्ट अत्यधिक गर्मी को केवल पर्यावरणीय या स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि वृद्धि और रोज़गार का संरचनात्मक प्रश्न बताती है। कारण पक्ष में तेज़ शहरीकरण, घनी निर्मित बस्तियाँ, छाया व हरित आवरण की कमी और शहरी ताप द्वीप प्रभाव हैं, जो पहले से अत्यधिक तापमान को और बढ़ाते हैं; भारत में कृषि (66%) और निर्माण (20%) जैसे बाहरी कार्य वाले क्षेत्र सर्वाधिक श्रम घंटे खोते हैं। परिणाम कई स्तरों पर दिखते हैं — 2024 में 194 अरब डॉलर की संभावित आय का नुकसान, रिकॉर्ड बिजली मांग और 40 डिग्री से ऊपर बिजली कटौती में 20-50 प्रतिशत वृद्धि, मुंबई-नागपुर एक्सप्रेसवे जैसी संपत्तियों को नुकसान, हवाई अड्डों पर परिचालन बाधाएँ, और एक पाँच-दिवसीय लू से जुड़ी लगभग 30,000 अतिरिक्त मौतें; निवेश आकर्षण भी प्रभावित होता है। आगे का रास्ता, रिपोर्ट के अनुसार, नई योजनाएँ गढ़ने की बजाय मौजूदा कार्यक्रमों में ताप-लचीलापन जोड़ना है — प्रधानमंत्री आवास योजना में पैसिव कूलिंग, बाहरी श्रमिकों के लिए मज़बूत संरक्षण, लू को अधिसूचित आपदा घोषित करना ताकि राहत कोष तक पहुँच बने, और उपराष्ट्रीय स्तर पर पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ, जिनका प्रतिफल प्रति डॉलर लगभग 50 डॉलर आँका गया है। साथ ही सस्ते कूलिंग उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को 2040 तक 1.6 ट्रिलियन डॉलर के निवेश अवसर और ~37 लाख नौकरियों के रूप में देखा जा सकता है।
मुख्य शब्द
- शहरी ताप द्वीप (Urban Heat Island - UHI)
- घनी निर्मित शहरी क्षेत्रों में आसपास की तुलना में अतिरिक्त गर्मी जमा होने की परिघटना, जो पहले से अधिक तापमान को और बढ़ाती है।
- संभावित श्रम घंटे (potential labour hours)
- वे कार्य-घंटे जो गर्मी के कारण काम रुकने या धीमा होने से खो गए; भारत में 2024 में 247 अरब घंटे।
- पैसिव कूलिंग
- बिजली आधारित उपकरणों के बिना डिज़ाइन व निर्माण उपायों से इमारतों को ठंडा रखने की विधि; रिपोर्ट इसे PMAY में जोड़ने की सिफ़ारिश करती है।
- अधिसूचित आपदा (notified disaster)
- आपदा के रूप में औपचारिक मान्यता, जिससे राहत कोष तक पहुँच बनती है; रिपोर्ट लू को इसमें शामिल करने की सिफ़ारिश करती है।
- ताप पूर्व चेतावनी प्रणाली (Heat Early Warning System)
- गर्मी की चेतावनी देने वाली व्यवस्था; विश्व बैंक विश्लेषण के अनुसार भारतीय शहरों में प्रति 1 डॉलर खर्च पर ~50 डॉलर प्रतिफल।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY)
- सरकार की आवास योजना, जिसमें रिपोर्ट पैसिव कूलिंग उपायों को शामिल करने की सलाह देती है।
अभ्यास प्रश्न
- अत्यधिक गर्मी भारत में श्रम उत्पादकता और रोज़गार को किस प्रकार प्रभावित कर रही है? विश्व बैंक रिपोर्ट के आँकड़ों के आधार पर परीक्षण करें।
- क्या लू को 'अधिसूचित आपदा' के रूप में मान्यता देना भारत की ताप-प्रबंधन नीति को मज़बूत करेगा? तर्क सहित चर्चा करें।
- शहरी ताप द्वीप प्रभाव क्या है और तेज़ शहरीकरण के दौर में इसे कम करने के लिए किन नीतिगत हस्तक्षेपों की आवश्यकता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।