240 साल बाद इंग्लैंड में सफेद पूंछ वाले चील का प्रजनन

इंग्लैंड में सफेद पूंछ वाले चील की पुनर्वापसी परियोजना के तहत इस गर्मी में तीन और चूजों ने उड़ान भरी, जिससे जंगल में जन्मे चूजों की संख्या नौ हो गई है। फॉरेस्ट्री इंग्लैंड की रिपोर्ट के अनुसार, दो नर चूजे ससेक्स में और एक डोरसेट में जन्मे तथा तीनों को सैटेलाइट टैग लगाए गए। दक्षिणी इंग्लैंड में अंतिम जोड़े ने 1780 में प्रजनन किया था। 2019 में छह पक्षियों से शुरू हुई परियोजना में अब तक 56 पक्षी छोड़े गए हैं।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Nine wild-born chicks have been produced by the project, including three this summer. — Figure appears in source, attributed to the Forestry England online report.
  • The last white-tailed eagle pair bred in southern England in 1780. — Stated in source and attributed to the report; the article elsewhere says 'almost a quarter of a century' since disappearance, which is internally inconsistent with the 240-year framing.
  • The reintroduction began in 2019 with six birds; 56 young eagles have since been released. — Both figures appear in the source, attributed to the report.
  • Nest cameras recorded more than 300 instances of food being brought to chicks, mostly fish. — Figure appears in source, attributed to the report; no independent data cited.
  • A Dorset breeding male has survived with one leg, lost five years ago. — Attributed to the report; no supporting detail or named source given.

विश्लेषकों की राय राय

AI रणनीतिक मामलों के विश्लेषक

ऊपर से यह वन्यजीव की खबर है, लेकिन इसके भीतर राज्य की क्षमता की कहानी छिपी है। 240 साल से गायब एक प्रजाति को फिर बसाना लाइसेंसिंग व्यवस्था, ब्रिटेन के भीतर प्रशासनिक तालमेल, उपग्रह निगरानी और वर्षों तक टिकी फंडिंग — इन सबके एक साथ काम करने पर निर्भर करता है। उपग्रह टैग, घोंसलों के पास विशेष कैमरे और आहार विश्लेषण दिखाते हैं कि निगरानी तकनीक अब नागरिक पर्यावरण-प्रशासन का औजार बन रही है; कार्यक्रम रिलीज़ चरण से आत्मनिर्भर उपस्थिति की ओर बढ़ता दिख रहा है, पर जंगल में जन्मे नौ बच्चे अभी बहुत छोटा आधार हैं।

  • 2019 में छह पक्षियों से शुरू होकर 56 पक्षियों की रिहाई तक पहुँचा कार्यक्रम दशकों की समयसीमा में सोचने वाली संस्थागत निरंतरता दिखाता है, जो किसी भी नीति क्षेत्र में दुर्लभ है।
  • नेचुरल इंग्लैंड के लाइसेंस के तहत रिहाई और नेचरस्कॉट के लाइसेंस के तहत स्कॉटलैंड के घोंसलों से पक्षियों का संग्रह — यह दिखाता है कि पूरी कोशिश ब्रिटेन के भीतर प्रशासनिक समन्वय पर टिकी है।
  • उपग्रह टैगिंग, घोंसलों के कैमरे और 300 से अधिक दर्ज भोजन-घटनाएँ बताती हैं कि निगरानी तकनीक पर्यावरणीय प्रशासन का मानक उपकरण बनती जा रही है।
  • आहार में मछली की प्रधानता का अर्थ है कि इस प्रजाति का भविष्य नदियों, आर्द्रभूमियों और तटों की सेहत से जुड़ा है — यानी यह केवल पक्षी परियोजना नहीं, भूमि व जल-उपयोग नीति का सवाल भी है।
  • आइल ऑफ वाइट के साथ-साथ एक्समूर नेशनल पार्क में पहली बार रिहाई एक ही केंद्र पर निर्भरता घटाकर जोखिम फैलाने की सोच दर्शाती है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि शेष तीन स्थापित जोड़े आने वाले मौसमों में प्रजनन करते हैं या नहीं, और एक्समूर जैसे नए क्षेत्रों में रिहाई पर स्थानीय भूमि-उपयोग पक्षों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।

यह खबर यह साबित नहीं करती कि आबादी वाकई आत्मनिर्भर हो गई है, या दीर्घकालिक फंडिंग और राजनीतिक समर्थन सुरक्षित है; स्थानीय किसानों या भूस्वामियों की किसी आपत्ति पर इसमें कोई जानकारी नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 6 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

सफेद पूंछ वाला चील (व्हाइट-टेल्ड ईगल) ब्रिटेन का सबसे बड़ा शिकारी पक्षी है, जिसका पंख-विस्तार लगभग 2.5 मीटर तक होता है। मानव उत्पीड़न के कारण यह प्रजाति इंग्लैंड से विलुप्त हो गई थी और दक्षिणी इंग्लैंड में इसके अंतिम जोड़े का प्रजनन 1780 में दर्ज हुआ था। फॉरेस्ट्री इंग्लैंड और रॉय डेनिस वाइल्डलाइफ फाउंडेशन द्वारा चलाई जा रही पुनर्वापसी (रीइंट्रोडक्शन) परियोजना 2019 में छह पक्षियों के साथ शुरू हुई। फॉरेस्ट्री इंग्लैंड की ऑनलाइन रिपोर्ट के अनुसार इस गर्मी में तीन और चूजों ने उड़ान भरी, जिससे परियोजना से जंगल में जन्मे चूजों की संख्या नौ हो गई है।

मुख्य तथ्य

  • इस गर्मी में तीन और चूजों ने उड़ान भरी (फ्लेज), जिससे परियोजना के तहत जंगल में जन्मे चूजों की कुल संख्या नौ हो गई।
  • दो नर चूजे ससेक्स में और एक नर चूजा डोरसेट में जन्मा; तीनों को सैटेलाइट टैग लगाए गए।
  • ससेक्स का जोड़ा 2023 से हर साल सफलतापूर्वक प्रजनन कर रहा है; इसके माता-पिता 2020 में इंग्लैंड में छोड़े गए पक्षियों में से थे।
  • डोरसेट के जोड़े ने दूसरी बार चूजे पाले; इस जोड़े का नर पाँच साल पहले एक पैर गँवा चुका है, फिर भी जीवित है।
  • दक्षिणी इंग्लैंड में अंतिम जोड़े का प्रजनन 1780 में दर्ज है; परियोजना 2019 में पहले छह पक्षियों की रिहाई से शुरू हुई।
  • अब तक 56 युवा सफेद पूंछ वाले चील इंग्लैंड के परिदृश्य में छोड़े गए हैं; पाँच जोड़ों ने स्थायी बंधन बनाए और दो ने इस वर्ष चूजे दिए।
  • घोंसलों के पास लगे विशेष कैमरों ने चूजों को भोजन दिए जाने की 300 से अधिक घटनाएँ दर्ज कीं, जिनमें मछली प्रमुख रही।
  • इस गर्मी में आइल ऑफ वाइट स्थित परियोजना केंद्र से पाँच चील तथा पहली बार एक्समूर नेशनल पार्क में छह पक्षी छोड़े गए।

समयरेखा

  1. 1780दक्षिणी इंग्लैंड में सफेद पूंछ वाले चील के अंतिम जोड़े का प्रजनन दर्ज किया गया।
  2. 2019आधुनिक पुनर्वापसी प्रयास की शुरुआत; पहले छह पक्षी छोड़े गए।
  3. 2020इंग्लैंड में और चील छोड़े गए, जिनमें ससेक्स के वर्तमान प्रजनन जोड़े के माता-पिता शामिल थे।
  4. लगभग पाँच साल पहलेडोरसेट के प्रजनन जोड़े के नर चील ने अपना एक पैर गँवाया।
  5. 2023ससेक्स का जोड़ा प्रजनन शुरू करता है और तब से हर साल सफलतापूर्वक प्रजनन कर रहा है।
  6. इस गर्मी (2025 की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष स्रोत में स्पष्ट नहीं)तीन चूजों ने उड़ान भरी; आइल ऑफ वाइट से पाँच और एक्समूर से छह पक्षी छोड़े गए।

किसका दाँव

  • फॉरेस्ट्री इंग्लैंड — पुनर्वापसी कार्यक्रम की सह-संचालक संस्था; रिपोर्ट और निगरानी डेटा जारी करती है।
  • रॉय डेनिस वाइल्डलाइफ फाउंडेशन — कार्यक्रम की सह-भागीदार संस्था, जो पक्षियों की रिहाई और संरक्षण में शामिल है।
  • नेचुरल इंग्लैंड — जिसके लाइसेंस के तहत इंग्लैंड में चीलों की रिहाई की जाती है।
  • नेचरस्कॉट — इसके लाइसेंस के तहत स्कॉटलैंड के जंगली घोंसलों से पुनर्वापसी हेतु पक्षी एकत्र किए जाते हैं।
  • एक्समूर नेशनल पार्क अथॉरिटी — साझेदारी में पहली बार एक्समूर में छह चीलों की रिहाई की मेजबानी।
  • संरक्षण शोधकर्ता एवं टीमें — सैटेलाइट टैग और घोंसला-कैमरों से पक्षियों की गतिविधि व आहार का अध्ययन।

क्यों अहम है

दो शताब्दियों से अधिक समय तक इंग्लैंड से अनुपस्थित रही प्रजाति के जंगल में जन्मे चूजों की पहली उड़ानें दिखाती हैं कि सुनियोजित पुनर्वापसी से विलुप्त हो चुके शीर्ष शिकारी वापस लौट सकते हैं। स्थायी जोड़ों के अपने चूजे पालने के साथ यह प्रयास केवल रिहाई कार्यक्रम से आगे बढ़कर आत्मनिर्भर आबादी की दिशा में जा रहा है। यह मामला आवास, कानूनी लाइसेंसिंग और वैज्ञानिक निगरानी पर आधारित संरक्षण मॉडल का उदाहरण है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • सफेद पूंछ वाला चील ब्रिटेन का सबसे बड़ा शिकारी पक्षी; पंख-विस्तार लगभग 2.5 मीटर।
  • दक्षिणी इंग्लैंड में अंतिम प्रजनन 1780 में; पुनर्वापसी परियोजना 2019 में छह पक्षियों से शुरू।
  • परियोजना संचालक: फॉरेस्ट्री इंग्लैंड + रॉय डेनिस वाइल्डलाइफ फाउंडेशन; अब तक 56 पक्षी छोड़े गए।
  • रिहाई नेचुरल इंग्लैंड के लाइसेंस से; स्कॉटलैंड के जंगली घोंसलों से पक्षी नेचरस्कॉट के लाइसेंस से एकत्र।
  • परियोजना का आधार केंद्र आइल ऑफ वाइट; पहली बार एक्समूर नेशनल पार्क में छह पक्षी छोड़े गए।
  • घोंसला कैमरों में 300+ भोजन-आपूर्ति घटनाएँ; आहार में मछली प्रमुख — आर्द्रभूमि/नदी/तटीय जुड़ाव।

मेन्स दृष्टिकोण

इंग्लैंड में सफेद पूंछ वाले चील की वापसी दर्शाती है कि प्रजातियों का स्थानीय विलोपन मुख्यतः मानव उत्पीड़न जैसे सीधे दबावों से होता है, और इसका उपचार भी दीर्घकालिक, वैज्ञानिक रूप से प्रबंधित हस्तक्षेप से संभव है। 1780 में अंतिम प्रजनन के बाद 2019 से शुरू हुई परियोजना में 56 पक्षी छोड़े गए, पाँच स्थायी जोड़े बने और जंगल में जन्मे चूजों की संख्या नौ तक पहुँची — यह क्रमिक प्रगति बताती है कि पुनर्वापसी में दशकों का धैर्य, उपयुक्त आवास (आर्द्रभूमि, नदियाँ, तट), स्रोत आबादी (स्कॉटलैंड) से पक्षियों की आपूर्ति और नियामकीय लाइसेंसिंग (नेचुरल इंग्लैंड, नेचरस्कॉट) की जरूरत होती है। सैटेलाइट टैगिंग और घोंसला-कैमरे जैसी निगरानी तकनीकें अनुकूलन, विचरण और आहार (जिसमें मछली प्रमुख) को समझने में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं, जिससे भावी रिहाई स्थलों का चयन — जैसे एक्समूर नेशनल पार्क में पहली रिहाई — प्रमाण-आधारित बनता है। आगे की राह में रिहाई क्षेत्रों का विस्तार, स्थानीय हितधारकों/पार्क प्राधिकरणों के साथ साझेदारी, और आत्मनिर्भर प्रजनन आबादी की स्थापना तक निगरानी जारी रखना शामिल है; भारत जैसे देशों के लिए भी यह शीर्ष शिकारी के पुनर्वास और वैज्ञानिक ट्रैकिंग का उपयोगी सबक है।

मुख्य शब्द

व्हाइट-टेल्ड ईगल (सफेद पूंछ वाला चील)
ब्रिटेन का सबसे बड़ा शिकारी पक्षी, पंख-विस्तार लगभग 2.5 मीटर, आर्द्रभूमि व तटीय क्षेत्रों से जुड़ा।
रीइंट्रोडक्शन (पुनर्वापसी)
जिस क्षेत्र से कोई प्रजाति विलुप्त हो गई हो, वहाँ प्रबंधित तरीके से उसे फिर से बसाना।
फ्लेज (उड़ान भरना)
चूजे का पंख विकसित होकर घोंसला छोड़कर पहली उड़ान भरने की अवस्था।
फॉरेस्ट्री इंग्लैंड
परियोजना संचालित करने वाली संस्था, जिसने पुनर्वापसी की प्रगति पर ऑनलाइन रिपोर्ट जारी की।
नेचुरल इंग्लैंड / नेचरस्कॉट
क्रमशः इंग्लैंड में रिहाई और स्कॉटलैंड के जंगली घोंसलों से पक्षी एकत्र करने के लिए लाइसेंस देने वाली एजेंसियाँ।
सैटेलाइट टैगिंग
पक्षियों पर उपकरण लगाकर उनकी गतिविधि, क्षेत्र-निर्माण और अनुकूलन की उपग्रह आधारित निगरानी।

अभ्यास प्रश्न

  1. प्रजातियों की पुनर्वापसी (रीइंट्रोडक्शन) परियोजनाओं की सफलता किन कारकों पर निर्भर करती है? इंग्लैंड में सफेद पूंछ वाले चील के उदाहरण से समझाइए।
  2. शीर्ष शिकारी पक्षियों का किसी परिदृश्य में लौटना पारिस्थितिक तंत्र और आर्द्रभूमि संरक्षण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? चर्चा कीजिए।
  3. सैटेलाइट टैगिंग और कैमरा निगरानी जैसी तकनीकें वन्यजीव संरक्षण नीति को कैसे प्रमाण-आधारित बनाती हैं? उदाहरण सहित परीक्षण कीजिए।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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