अक्टूबर-दिसंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश: आईएमडी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। विभाग ने 13 प्रतिशत की कमी के साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून की समाप्ति घोषित की है। उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में सामान्य या अधिक बारिश हो सकती है। दक्षिणी प्रायद्वीप के लिए 334.13 मिमी दीर्घकालिक औसत का 88-112 प्रतिशत अनुमान है। आईआरआई के अनुसार सितंबर मध्य तक निनो 3.4 विचलन +3 डिग्री पहुंचा।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- IMD forecasts below-normal rainfall over most of India during October-December 2026. — Attributed to IMD's latest probabilistic forecast in the source; described as most likely category, not a certainty.
- The southwest monsoon ended with a 13% deficit. — Figure appears in source, attributed to IMD's declaration of the season's end.
- South Peninsular India seasonal rainfall forecast normal, 88-112% of an LPA of 334.13 mm (1971-2020 baseline). — Figures appear in source and are attributed to IMD; internally consistent.
- Nino 3.4 sea-surface temperature anomaly reached +3°C by mid-September, with all 22 models indicating very strong El Nino through winter. — Attributed to the September 2026 IRI assessment; not independently verifiable here.
- Northeast monsoon accounts for about 30% of south Peninsular India's annual rainfall; Tamil Nadu and Puducherry get nearly half their annual rain then. — Stated in source without a named source for the climatological share.
विश्लेषकों की राय राय
बारिश का पूर्वानुमान अब सिर्फ वैज्ञानिक जानकारी नहीं, बल्कि राजनीतिक एजेंडा तय करने वाला दस्तावेज़ है। दक्षिण-पश्चिम मानसून 13 प्रतिशत की कमी के साथ खत्म होने के बाद अक्टूबर-दिसंबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान का मतलब है कि किसानों की आय, पेयजल, बिजली और खाद्य कीमतें एक साथ केंद्र और राज्यों की परीक्षा बन जाएंगी। पूर्वोत्तर मानसून पर निर्भर तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे क्षेत्रों में इस पूर्वानुमान का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है।
- दक्षिण प्रायद्वीप के लिए सामान्य बारिश (दीर्घकालिक औसत का 88-112 प्रतिशत) का अनुमान वहां की सरकारों के लिए राहत है, लेकिन देशव्यापी कमी केंद्र पर राहत उपायों का दबाव बढ़ाती है।
- सूखे और पानी की कमी के दौर में आम तौर पर आपदा राहत कोष, मुआवज़े और कर्ज़माफ़ी की मांगें तेज़ होती हैं, जो केंद्र-राज्य रिश्तों में टकराव की जानी-पहचानी वजह बनती हैं।
- पहले से चेतावनी मिलना राजनीतिक रूप से दोनों तरफ काम करता है: सरकारें तैयारी का दावा कर सकती हैं, तो विपक्ष पूछ सकता है कि संकेत मिलने के बाद भी कदम क्यों नहीं उठे।
- पूर्वोत्तर मानसून दक्षिण प्रायद्वीप की सालाना बारिश का लगभग 30 प्रतिशत देता है, इसलिए जल प्रबंधन और जलाशयों का बंटवारा अंतरराज्यीय राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
- आईएमडी का अनुमान संभाव्य है और क्षेत्रवार भिन्नता ज़्यादा है, इसलिए कुल कमी के बीच भी स्थानीय भारी बारिश हुई तो सरकारों को बाढ़ की तैयारी पर अलग किस्म की आलोचना झेलनी पड़ सकती है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि राज्य जल प्रबंधन, फसल सलाह और राहत पैकेज की मांगों के साथ पहले कदम उठाते हैं या नहीं, और केंद्र की प्रतिक्रिया क्या रहती है।
यह खबर केवल मौसम पूर्वानुमान बताती है; यह तय नहीं करती कि कोई सरकार क्या करेगी, कोई राहत या नीतिगत घोषणा हुई है या नहीं, या इसका चुनावी राजनीति पर क्या असर होगा।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अक्टूबर से दिसंबर 2026 की मानसून-पश्चात (पोस्ट-मानसून) अवधि के लिए देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। यह पूर्वानुमान उस समय आया है जब आईएमडी ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की समाप्ति 13 प्रतिशत की कमी के साथ घोषित की। इसी दौरान उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अल नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है, जिसका असर वैश्विक और भारतीय मौसम पैटर्न पर पड़ता है। अक्टूबर-दिसंबर की अवधि दक्षिण भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ उत्तर-पूर्वी मानसून से बड़ी मात्रा में वर्षा होती है।
मुख्य तथ्य
- आईएमडी के अनुसार अक्टूबर-दिसंबर 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून 13 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त हुआ, जिसके बाद आईएमडी ने बारिश का मौसम खत्म घोषित किया।
- उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीप के दक्षिणी भागों में सामान्य से सामान्य-से-अधिक बारिश की संभावना है।
- समग्र दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए मौसमी वर्षा सामान्य, अर्थात दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के 88 से 112 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है।
- अक्टूबर-दिसंबर के लिए दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत का एलपीए 334.13 मिमी है, जो 1971-2020 के वर्षा आंकड़ों पर आधारित है।
- उत्तर-पूर्वी मानसून दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 30 प्रतिशत देता है; तमिलनाडु और पुडुचेरी को इस मौसम में अपनी वार्षिक वर्षा का लगभग आधा मिलता है।
- आईआरआई के सितंबर 2026 आकलन के अनुसार सितंबर के मध्य तक निनो 3.4 समुद्री सतह तापमान विचलन +3 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया।
- आईआरआई के सभी 22 पूर्वानुमान मॉडल संकेत देते हैं कि सर्दियों तक अत्यंत मजबूत अल नीनो स्थितियाँ बनी रह सकती हैं, जो 2027 की शुरुआत तक जारी रह सकती हैं।
समयरेखा
- सितंबर 2026 का मध्यनिनो 3.4 क्षेत्र में समुद्री सतह तापमान विचलन +3 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचा (आईआरआई आकलन)।
- सितंबर 2026आईआरआई के आकलन में कहा गया कि 2026 का अल नीनो तेजी से तीव्र हुआ है और वर्ष के अंत तक बहुत मजबूत रहेगा।
- मानसून की समाप्ति (तारीख स्रोत में नहीं दी गई)आईएमडी ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की समाप्ति 13 प्रतिशत की कमी के साथ घोषित की।
- अक्टूबर-दिसंबर 2026आईएमडी का पूर्वानुमान: देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा।
- 2027 की शुरुआतअल नीनो स्थितियों के बने रहने की संभावना।
किसका दाँव
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) — संभाव्यता-आधारित (प्रोबेबिलिस्टिक) मौसमी पूर्वानुमान जारी करना और 1971-2020 आधार वर्ष पर जलवायु-विज्ञान तैयार करना।
- तमिलनाडु और पुडुचेरी — अपनी वार्षिक वर्षा का लगभग आधा हिस्सा अक्टूबर-दिसंबर के उत्तर-पूर्वी मानसून से प्राप्त करते हैं।
- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत — क्षेत्र की वार्षिक वर्षा का करीब 30 प्रतिशत उत्तर-पूर्वी मानसून से आता है; पूर्वानुमान सामान्य श्रेणी में है।
- इंटरनेशनल रिसर्च इंस्टिट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सोसाइटी (आईआरआई) — अल नीनो की तीव्रता का अंतरराष्ट्रीय जलवायु आकलन प्रस्तुत करता है।
- उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्से — देशव्यापी कमी के बावजूद सामान्य से सामान्य-से-अधिक वर्षा की संभावना।
- आम नागरिक और किसान — सामान्य से शुष्क मौसम, लेकिन व्यक्तिगत मौसम प्रणालियों से भारी बारिश के दौर भी संभव।
क्यों अहम है
अक्टूबर-दिसंबर दक्षिण भारत के लिए वर्षा का सबसे महत्वपूर्ण मौसम है, इसलिए इस अवधि में सामान्य से कम बारिश का व्यापक पूर्वानुमान जल उपलब्धता और क्षेत्रीय योजना के लिहाज से अहम है। 13 प्रतिशत की कमी के साथ समाप्त हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाद यह पूर्वानुमान लगातार दूसरी शुष्क अवधि की ओर संकेत करता है। साथ ही आईएमडी का पूर्वानुमान संभाव्यता-आधारित है, अर्थात कुल शुष्क मौसम में भी अलग-अलग क्षेत्रों में भारी बारिश के दौर आ सकते हैं।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- आईएमडी का अक्टूबर-दिसंबर 2026 पूर्वानुमान: देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 की समाप्ति 13 प्रतिशत कमी के साथ हुई।
- दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत का अक्टूबर-दिसंबर एलपीए = 334.13 मिमी (आधार अवधि 1971-2020); 'सामान्य' श्रेणी = एलपीए का 88-112 प्रतिशत।
- उत्तर-पूर्वी मानसून दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 30 प्रतिशत देता है; तमिलनाडु व पुडुचेरी को लगभग आधी वार्षिक वर्षा।
- निनो 3.4 समुद्री सतह तापमान विचलन सितंबर 2026 के मध्य तक +3 डिग्री सेल्सियस; आईआरआई के सभी 22 मॉडल अत्यंत मजबूत अल नीनो के संकेत देते हैं।
- अल नीनो: मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत का प्राकृतिक तापन, जो ऐतिहासिक रूप से कमजोर मानसून वर्षा से जुड़ा रहा है।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत की वर्षा व्यवस्था केवल दक्षिण-पश्चिम मानसून तक सीमित नहीं है; अक्टूबर-दिसंबर का उत्तर-पूर्वी मानसून दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 30 प्रतिशत और तमिलनाडु-पुडुचेरी की लगभग आधी वर्षा देता है, इसलिए आईएमडी का सामान्य से कम वर्षा का पूर्वानुमान क्षेत्रीय जल-सुरक्षा के लिहाज से गंभीर है। इसका तात्कालिक कारण उष्णकटिबंधीय प्रशांत में तेजी से मजबूत होता अल नीनो है, जिसमें निनो 3.4 विचलन सितंबर 2026 के मध्य तक +3 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया और आईआरआई के सभी 22 मॉडल सर्दियों तक अत्यंत मजबूत स्थितियों के बने रहने का संकेत देते हैं; यह पूर्वानुमान 13 प्रतिशत कमी वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून के बाद आया है। हालांकि स्रोत स्पष्ट करता है कि भारत की वर्षा कई अन्य समुद्री और वायुमंडलीय कारकों से भी तय होती है, और आईएमडी का पूर्वानुमान संभाव्यता-आधारित है—यह सबसे संभावित श्रेणी बताता है, वर्षा के अभाव की गारंटी नहीं। आगे का रास्ता क्षेत्र-विशिष्ट व्याख्या पर टिका है: कुछ क्षेत्रों में मॉडल का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है, उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के भागों में सामान्य या अधिक वर्षा संभव है, और व्यक्तिगत मौसम प्रणालियाँ शुष्क मौसम में भी भारी वर्षा के दौर ला सकती हैं—अर्थात तैयारी सूखे और अचानक भारी वर्षा, दोनों के लिए आवश्यक है।
मुख्य शब्द
- आईएमडी (भारत मौसम विज्ञान विभाग)
- भारत की राष्ट्रीय मौसम एजेंसी, जिसने अक्टूबर-दिसंबर 2026 का संभाव्यता-आधारित वर्षा पूर्वानुमान जारी किया।
- दीर्घकालिक औसत (एलपीए)
- किसी क्षेत्र की दीर्घ अवधि की औसत वर्षा; दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए अक्टूबर-दिसंबर में 334.13 मिमी (1971-2020 आधार)।
- उत्तर-पूर्वी मानसून
- अक्टूबर-दिसंबर की वर्षा ऋतु, जो दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 30 प्रतिशत देती है।
- अल नीनो
- मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का प्राकृतिक तापन, जो विश्वभर के मौसम पैटर्न बदल सकता है।
- निनो 3.4 विचलन
- प्रशांत महासागर के निनो 3.4 क्षेत्र में समुद्री सतह तापमान का सामान्य से अंतर; सितंबर 2026 के मध्य तक +3 डिग्री सेल्सियस।
- संभाव्यता-आधारित पूर्वानुमान
- ऐसा पूर्वानुमान जो सबसे संभावित वर्षा श्रेणी बताता है, न कि वर्षा होने या न होने की निश्चितता।
अभ्यास प्रश्न
- उत्तर-पूर्वी मानसून दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है? अक्टूबर-दिसंबर 2026 के आईएमडी पूर्वानुमान के आलोक में चर्चा करें।
- अल नीनो भारत की वर्षा को कैसे प्रभावित करता है? 2026 की स्थिति के उदाहरण सहित समझाइए और बताइए कि वर्षा केवल अल नीनो से ही तय क्यों नहीं होती।
- संभाव्यता-आधारित मौसमी पूर्वानुमान और दीर्घकालिक औसत (एलपीए) की अवधारणा स्पष्ट करें; 'सामान्य वर्षा' को कैसे परिभाषित किया जाता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
