तकनीक का स्वामित्व भारत में हो: सैमटेल सीईओ

भारत जब तक अपनी तकनीक विकसित नहीं करता और उसका स्वामित्व हासिल नहीं करता, तब तक वह विकसित भारत नहीं बन सकता, यह बात सैमटेल एवियोनिक्स के स���ईओ पुनीत कौरा ने रविवार को कही। एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में उन्होंने कहा कि केवल मेक इन इंडिया नहीं, बल्कि ओन इन इंडिया जरूरी है। ड्रोन, एआई, अंतरिक्ष, सेंसर और स्वचालित प्रणालियों में अवसर हैं। ऑटोपायलट, नेविगेशन, गिम्बल और पेलोड अब भी आयात होते हैं।

स्रोत

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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की

डेस्क ने क्या जाँचा (4)
  • India cannot become a Viksit Bharat without enough owned-in-India IP-wise technologies. — Direct quote attributed to Samtel Avionics CEO Puneet Kaura at the NDTV Defence Summit 2026.
  • Samtel supplies products to foreign air forces in Southeast Asia and Africa and is in talks with US customers. — Stated in source without independent documentation; attributed to the company/CEO.
  • Autopilot systems, navigation systems, gimbals and payloads used in drones are still imported. — Attributed to Kaura; no supporting data or figures given in source.
  • Samtel is working on space debris management with a Japanese partner. — Appears in source; partner company not named.

विश्लेषकों की राय राय

AI आर्थिक विश्लेषक

"मेक इन इंडिया" से "ओन इन इंडिया" की ओर बढ़ने की दलील मूल रूप से यह बताती है कि मूल्य श्रृंखला में कमाई कहाँ बैठती है — असेंबली में मार्जिन पतला होता है, जबकि डिज़ाइन और बौद्धिक संपदा (आईपी) ही सबसे बड़ा हिस्सा पकड़ती है। सीईओ का यह कहना कि ऑटोपायलट, नेविगेशन, गिम्बल और पेलोड अब भी आयात होते हैं, संकेत देता है कि ड्रोन की कीमत का बड़ा हिस्सा आज भी विदेश जा रहा है। यानी घरेलू उत्पादन बढ़ने के बाद भी आयात बिल, मुद्रा जोखिम और सप्लाई-चेन निर्भरता बनी रह सकती है।

  • आईपी के स्वामित्व के बिना निर्माण का मतलब है कि लाइसेंस शुल्क, रॉयल्टी और कलपुर्जों के आयात के रूप में मूल्य बाहर जाता रहेगा।
  • यह बात आर्थिक रूप से अहम है कि असली क्षमता टियर-1 और टियर-2 वेंडर स्तर पर बनती है — कुशल रोज़गार और सप्लाई-चेन की गहराई इसी एमएसएमई परत में बनती है।
  • निर्यात ही असली परीक्षा है: दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका की वायुसेनाओं को आपूर्ति तथा अमेरिकी ग्राहकों से बातचीत, घरेलू रक्षा खरीद पर ही निर्भर न रहने वाले स्केल का रास्ता दिखाती है।
  • लेकिन आईपी बनाने में भारी और लंबी अवधि वाला आरएंडडी निवेश लगता है, और यह खर्च कौन उठाएगा — निजी पूंजी, सुनिश्चित सरकारी ऑर्डर या सब्सिडी — यह खबर स्पष्ट नहीं करती।
  • आईओटी को कृषि, मत्स्य पालन और रेलवे तक ले जाने की सोच एक दोहरे-उपयोग मॉडल की ओर इशारा करती है, जो रक्षा आरएंडडी लागत को नागरिक बाज़ारों में बाँटकर प्रति-इकाई लागत घटा सकती है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि ड्रोन के उप-तंत्र — ऑटोपायलट, नेविगेशन, गिम्बल, पेलोड — कितनी तेज़ी से वास्तव में स्वदेशी होते हैं, और भारतीय कंपनियों की निर्यात बातचीत पक्के ऑर्डर में बदलती है या नहीं।

यह एक उद्योग सीईओ का नज़रिया है; खबर आयात की मात्रा, स्वदेशीकरण की दर, निवेश राशि या रोज़गार पर असर से जुड़ा कोई आँकड़ा स्थापित नहीं करती।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 1 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में सैमटेल एवियोनिक्स के सीईओ पुनीत कौरा ने कहा कि भारत जब तक अपनी तकनीक और बौद्धिक संपदा (आईपी) का स्वामित्व हासिल नहीं करता, तब तक "विकसित भारत" नहीं बन सकता। सैमटेल एक प्रसिद्ध रक्षा एवियोनिक्स कंपनी है, जो अब अंतरिक्ष तकनीक और ड्रोन निर्माण में भी विस्तार कर रही है। कौरा का तर्क है कि केवल "मेक इन इंडिया" पर्याप्त नहीं, "ओन इन इंडिया" जरूरी है, क्योंकि ड्रोन में उपयोग होने वाली कई महत्वपूर्ण प्रणालियाँ अब भी आयात की जाती हैं।

मुख्य तथ्य

  • सैमटेल एवियोनिक्स के सीईओ पुनीत कौरा ने रविवार, 27 सितंबर 2026 को एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में यह बात कही।
  • कौरा के शब्दों में: "हम कभी विकसित भारत नहीं बनेंगे जब तक हमारे पास पर्याप्त ओन्ड-इन-इंडिया आईपी वाली तकनीकें न हों।"
  • उन्होंने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, सेंसर और स्वचालित (ऑटोनॉमस) प्रणालियों में भारत के लिए बड़ा अवसर है।
  • ड्रोन में उपयोग होने वाली ऑटोपायलट प्रणाली, नेविगेशन प्रणाली, गिम्बल और पेलोड अब भी आयात किए जाते हैं।
  • कौरा के अनुसार वास्तविक क्षमता निर्माण प्लेटफॉर्म स्तर पर नहीं, बल्कि टियर-1 और टियर-2 वेंडरों के स्तर पर होता है।
  • सैमटेल दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका सहित कई विदेशी वायुसेनाओं को उत्पाद आपूर्ति कर रही है और अमेरिका के ग्राहकों से बातचीत कर रही है।
  • कंपनी इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक तलाश रही है, जिसके रक्षा के साथ कृषि, मत्स्यपालन और रेलवे में उपयोग हो सकते हैं।
  • सैमटेल अंतरिक्ष मलबा (स्पेस डेब्रिस) प्रबंधन पर काम कर रही है और इसके लिए एक जापानी कंपनी के साथ साझेदारी की है।

समयरेखा

  1. 27 सितंबर 2026 (रविवार)एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 में पुनीत कौरा ने "ओन इन इंडिया" और आईपी स्वामित्व की जरूरत रेखांकित की।

किसका दाँव

  • सैमटेल एवियोनिक्स — रक्षा एवियोनिक्स से आगे बढ़कर अंतरिक्ष तकनीक, ड्रोन निर्माण, IoT और अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन में विस्तार; विदेशी वायुसेनाओं को निर्यात।
  • भारतीय रक्षा उद्योग के टियर-1/टियर-2 वेंडर — कौरा के अनुसार वास्तविक क्षमता निर्माण इनके स्तर पर होता है; ऑटोपायलट, नेविगेशन, गिम्बल, पेलोड का स्वदेशीकरण इनकी भूमिका पर निर्भर।
  • रक्षा ग्राहक (सशस्त्र बल) — एवियोनिक्स में एआई आधारित सेंसिंग, डिटेक्शन और तेज खतरा-विश्लेषण की मांग कर रहे हैं।
  • भारत सरकार / मेक इन इंडिया नीति — केवल निर्माण से आगे बढ़कर बौद्धिक संपदा के स्वामित्व की दिशा में नीतिगत जोर की जरूरत का सवाल।
  • जापानी साझेदार कंपनी — अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन क्षेत्र में सैमटेल के साथ साझेदारी।

क्यों अहम है

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की बहस अब असेंबली और निर्माण से आगे बढ़कर बौद्धिक संपदा के स्वामित्व पर केंद्रित हो रही है। ड्रोन की मुख्य उपप्रणालियाँ आयात होने का अर्थ है कि रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षमताओं पर भारत का नियंत्रण सीमित रहता है। एआई, सेंसर और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी आईपी विकसित करने से भारत आयातक से वैश्विक आपूर्तिकर्ता की भूमिका में जा सकता है।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • एनडीटीवी डिफेंस समिट 2026 — 27 सितंबर 2026, जहाँ सैमटेल एवियोनिक्स सीईओ पुनीत कौरा ने "ओन इन इंडिया" का नारा दिया।
  • सैमटेल एवियोनिक्स: रक्षा एवियोनिक्स कंपनी, अब ड्रोन निर्माण और अंतरिक्ष तकनीक में विस्तार।
  • ड्रोन की आयातित प्रमुख उपप्रणालियाँ: ऑटोपायलट, नेविगेशन सिस्टम, गिम्बल, पेलोड।
  • सैमटेल ने अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन के लिए एक जापानी कंपनी से साझेदारी की है।
  • IoT के संभावित अनुप्रयोग क्षेत्र (स्रोत अनुसार): रक्षा, कृषि, मत्स्यपालन और रेलवे।
  • सैमटेल के निर्यात बाजार: दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका की वायुसेनाएँ; अमेरिका से बातचीत जारी।

मेन्स दृष्टिकोण

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की चुनौती केवल उत्पादन क्षमता की नहीं, तकनीकी स्वामित्व की है — यही सैमटेल एवियोनिक्स सीईओ पुनीत कौरा के "मेक इन इंडिया नहीं, ओन इन इंडिया" तर्क का सार है। कारण स्पष्ट हैं: ड्रोन जैसे उभरते प्लेटफॉर्म में भी ऑटोपायलट, नेविगेशन, गिम्बल और पेलोड जैसी निर्णायक उपप्रणालियाँ आयातित हैं, जिससे लागत, आपूर्ति-शृंखला और रणनीतिक स्वायत्तता तीनों पर जोखिम बना रहता है। इसका प्रभाव यह है कि अंतिम असेंबली भारत में होने पर भी मूल्य-शृंखला का उच्च-मूल्य हिस्सा और बौद्धिक संपदा बाहर रहती है, तथा एआई-आधारित सेंसिंग और तेज खतरा-पहचान जैसी भविष्य की क्षमताओं में भारत प्रारंभिक चरण में है, जबकि रक्षा ग्राहक ऐसी तकनीकों की मांग करने लगे हैं। आगे की राह के लिए स्रोत में सुझाया गया दृष्टिकोण है — टियर-1 और टियर-2 वेंडरों के स्तर पर वास्तविक क्षमता निर्माण, भारतीय कंपनियों का परस्पर सहयोग कर उपप्रणालियों का स्वदेशी विकास, स्वदेशी आईपी को वैश्विक बाजारों में ले जाना, और अंतरिक्ष, IoT तथा अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन जैसे नए क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का उ��योग।

मुख्य शब्द

एवियोनिक्स
विमान और वायुयानों में लगने वाली इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियाँ; सैमटेल इसी क्षेत्र की रक्षा कंपनी है।
ओन इन इंडिया
कौरा द्वारा दिया गया विचार कि भारत में केवल निर्माण न हो, बल्कि तकनीक और बौद्धिक संपदा का स्वामित्व भी भारत में हो।
गिम्बल और पेलोड
ड्रोन में कैमरा/सेंसर को स्थिर रखने वाली प्रणाली और उस पर लदे उपकरण; दोनों अब भी आयातित हैं।
टियर-1/टियर-2 वेंडर
मुख्य प्लेटफॉर्म निर्माता को उपप्रणालियाँ व पुर्जे देने वाली आपूर्तिकर्ता कंपनियाँ, जहाँ कौरा के अनुसार असली क्षमता बनती है।
इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
जुड़े उपकरणों की तकनीक; सैमटेल इसके रक्षा, कृषि, मत्स्यपालन और रेलवे में उपयोग तलाश रही है।
स्पेस डेब्रिस प्रबंधन
अंतरिक्ष में मौजूद मलबे के प्रबंधन का क्षेत्र, जिसमें सैमटेल एक जापानी कंपनी के साथ काम कर रही है।

अभ्यास प्रश्न

  1. "मेक इन इंडिया" और "ओन इन इंडिया" में अंतर स्पष्ट करते हुए बताइए कि रक्षा क्षेत्र में बौद्धिक संपदा का स्वामित्व रणनीतिक स्वायत्तता के लिए क्यों आवश्यक है।
  2. भारतीय ड्रोन उद्योग में ऑटोपायलट, नेविगेशन, गिम्बल और पेलोड जैसी उपप्रणालियों के आयात पर निर्भरता के क्या परिणाम हैं? टियर-1/टियर-2 पारिस्थितिकी तंत्र के सुदृढ़ीकरण के उपाय सुझाइए।
  3. रक्षा एवियोनिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावित भूमिका पर चर्चा कीजिए, विशेष रूप से सेंसिंग, डिटेक्शन और खतरा-विश्लेषण के संदर्भ में।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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