आरबीआई की डब्ल्यूएमए राशि 67,839 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव
राज्यों को वेज एंड मीन्स एडवांस (डब्ल्यूएमए) के जरिये भारतीय रिजर्व बैंक की नकदी सहायता की समीक्षा करने वाली समिति ने इस राशि को 11.2 प्रतिशत बढ़ाकर 67,839 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए यह सीमा अभी 61,008 करोड़ रुपये है। समिति ने राजस्व प्राप्तियों के आधार पर राज्यवार सीमा, वार्षिक समीक्षा में बढ़ोतरी 4 प्रतिशत तक सीमित रखने, लगातार ओवरड्राफ्ट दिन 14 से 10 और तिमाही सीमा 36 से 30 दिन करने तथा सीएसएफ के बदले एसडीएफ सीमा 50 से 75 प्रतिशत करने की सिफारिश की। कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएसएन प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट आरबीआई ने मंगलवार को जारी की।
स्रोत
Economic Times — Markets · मूल ख़बर पढ़ें ↗
डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Panel proposes raising the WMA corpus by 11.2% to Rs 67,839 crore from the present Rs 61,008 crore. — Figures appear in source and are attributed to the committee report released by RBI; the current limit is stated as effective January 9, 2026.
- The committee is headed by Karnataka's former additional chief secretary ISN Prasad and was formed on April 30 this year. — Attributed in source; the source does not specify the year beyond 'this year'.
- Panel suggests cutting continuous overdraft days from 14 to 10 and quarterly overdraft limit days from 36 to 30. — Figures appear in source as committee recommendations.
- Panel proposes raising the SDF limit against eligible investments held in CSF to 75% from 50%. — Appears in source, though the sentence is grammatically incomplete ('from the existing to 75% from 50%').
- Annual review of the WMA corpus with upward revision capped at 4%, based on last three years of accounts, with no reduction in existing limits. — Attributed to the committee report; no independent confirmation possible.
विश्लेषकों की राय राय
यह तकनीकी बदलाव जैसा दिखता है, लेकिन इसका सीधा असर इस पर है कि राज्य अपनी नकदी संभालने पर कितना खर्च करते हैं। डब्ल्यूएमए कोष को 61,008 करोड़ रुपये से 11.2 फीसदी बढ़ाकर 67,839 करोड़ रुपये करने से राज्यों को सस्ती अल्पकालिक तरलता की गुंजाइश मिलेगी, जबकि ओवरड्राफ्ट के दिन घटाकर अनुशासन भी कसा जा रहा है। समिति का संदेश साफ है — ज्यादा छूट, बदले में बेहतर नकदी प्रबंधन।
- राजस्व प्राप्तियों के आधार पर राज्यवार सीमा तय करने का मतलब है कि मजबूत वसूली वाले राज्यों को ज्यादा गुंजाइश और कमजोर राज्यों को कम — यह राजकोषीय अनुशासन के लिए प्रोत्साहन का काम कर सकता है।
- लगातार ओवरड्राफ्ट के दिन 14 से 10 और तिमाही सीमा 36 से 30 करने का मकसद ओवरड्राफ्ट को महंगा और असुविधाजनक विकल्प बनाना है।
- सीएसएफ के एवज में एसडीएफ सीमा 50 से 75 फीसदी करने से राज्य पहले अपनी ही सिंकिंग फंड बचत पर निर्भर होंगे, जिससे आरबीआई पर दबाव घटेगा और राज्यों का ब्याज खर्च बच सकता है।
- सालाना बढ़ोतरी 4 फीसदी तक सीमित रखना और मौजूदा सीमा में कटौती न करना राज्यों को अनुमान योग्य और स्थिर नियोजन माहौल देता है।
- समिति की यह टिप्पणी कि कुछ राज्य आरबीआई पर अति-निर्भर हैं और कुछ जरूरत से ज्यादा नकद रखते हैं, एक दक्षता की समस्या दिखाती है — बेकार पड़ी नकदी पर मिलने वाला रिटर्न आमतौर पर उससे कम होता है जो खर्च क्षमता गंवाकर चुकाया जाता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि आरबीआई इनमें से कितनी सिफारिशें कब से लागू करता है और राज्यवार सीमाएं कैसे बंटती हैं — असर उन राज्यों पर सबसे तेज होगा जो ओवरड्राफ्ट पर ज्यादा टिके हैं।
ये सिर्फ सिफारिशें हैं; खबर से यह स्थापित नहीं होता कि आरबीआई ने इन्हें स्वीकारा है, कब से लागू होंगी, राज्यवार आवंटन क्या होगा या ब्याज दरें क्या रहेंगी।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनकी प्राप्तियों व भुगतानों के बीच अस्थायी असंतुलन से निपटने के लिए वेज एंड मीन्स एडवांस (डब्ल्यूएमए) के जरिये नकदी सहायता देता है। इसके अलावा कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड (सीएसएफ), गारंटी रिडेम्पशन फंड (जीआरएफ) और नीलामी ट्रेजरी बिलों में निवेश के बदले स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी (एसडीएफ) से भी संपार्श्विक आधारित सहायता मिलती है। राज्य पहले एसडीएफ, फिर डब्ल्यूएमए का उपयोग करते हैं और डब्ल्यूएमए सीमा खत्म होने पर ओवरड्राफ्ट सुविधा सक्रिय होती है। कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएसएन प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति ने इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा कर सिफारिशें दी हैं, जिनकी रिपोर्ट आरबीआई ने मंगलवार को जारी की।
मुख्य तथ्य
- समिति ने डब्ल्यूएमए की कुल राशि 11.2 प्रतिशत बढ़ाकर 67,839 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया है।
- सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए डब्ल्यूएमए के तहत कुल उधारी सीमा अभी 61,008 करोड़ रुपये है, जो 9 जनवरी 2026 से प्रभावी है।
- समिति ने डब्ल्यूएमए राशि की वार्षिक समीक्षा और वार्षिक बढ़ोतरी 4 प्रतिशत तक सीमित रखने की सिफारिश की है।
- बढ़ोतरी की सीमा पिछले तीन वर्षों के लेखों पर आधारित हो सकती है, पर मौजूदा सीमा में कोई कटौती नहीं होगी।
- लगातार ओवरड्राफ्ट के दिन 14 से घटाकर 10 और तिमाही ओवरड्राफ्ट सीमा के दिन 36 से घटाकर 30 करने का सुझाव, ताकि ओवरड्राफ्ट लेना हतोत्साहित हो।
- सीएसएफ में रखे पात्र निवेशों के बदले एसडीएफ सीमा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव।
- राज्यवार डब्ल्यूएमए सीमा उनके कुल व्यय की तुलना में राजस्व प्राप्तियों के आधार पर तय करने की सिफारिश।
- यदि सीएसएफ/जीआरएफ की राशि राज्य के बकाया बिक्रीयोग्य कर्ज या गारंटी के 5 प्रतिशत से अधिक हो, तो अतिरिक्त शेष के बदले एसडीएफ से अधिक ब्याज दर पर सहायता दी जा सकती है।
समयरेखा
- 30 अप्रैल (इस वर्ष)आईएसएन प्रसाद की अध्यक्षता में डब्ल्यूएमए समीक्षा समिति का गठन।
- मंगलवारआरबीआई ने प्रसाद समिति की रिपोर्ट जारी की।
- 9 जनवरी 2026 से प्रभावीराज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की मौजूदा कुल डब्ल्यूएमए सीमा 61,008 करोड़ रुपये।
किसका दाँव
- भारतीय रिजर्व बैंक — डब्ल्यूएमए, एसडीएफ और ओवरड्राफ्ट सुविधाओं का संचालक; सीमाओं व ब्याज दरों पर निर्णय।
- राज्य सरकारें — प्राप्ति-भुगतान असंतुलन से निपटने के लिए नकदी सहायता; राज्यवार सीमा से उधारी की गुंजाइश बदलेगी।
- केंद्रशासित प्रदेश — कुल 61,008 करोड़ रुपये की मौजूदा सीमा में शामिल; प्रस्तावित बढ़ोतरी का लाभ।
- प्रसाद समिति (अध्यक्ष: आईएसएन प्रसाद, कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव) — डब्ल्यूएमए व्यवस्था की समीक्षा और सिफारिशें देना।
- आरबीआई पर अत्यधिक निर्भर राज्य तथा अधिक नकद शेष रखने वाले राज्य — समिति ने इन विषमताओं को रेखांकित करते हुए राजस्व प्राप्तियों आधारित सीमा तय करने का सुझाव दिया।
क्यों अहम है
राज्यों के बजट का आकार बढ़ने से आरबीआई से नकदी सहायता की जरूरत भी बढ़ रही है; इसलिए समिति ने डब्ल्यूएमए राशि बढ़ाने का पक्ष लिया है। दूसरी ओर ओवरड्राफ्ट के दिन घटाने और राज्यवार सीमा तय करने की सिफारिशें राज्यों की नकदी प्रबंधन अनुशासन को प्रभावित करेंगी। इससे यह भी तय होगा कि कौन राज्य केंद्रीय बैंक की सहायता पर अधिक निर्भर रहेंगे और कौन अपने सीएसएफ/जीआरएफ निवेश का बेहतर उपयोग कर पाएंगे।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- डब्ल्यूएमए (वेज एंड मीन्स एडवांस): आरबीआई द्वारा राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्राप्ति-भुगतान असंतुलन के लिए अल्पकालिक नकदी सहायता।
- राज्यों की मौजूदा कुल डब्ल्यूएमए सीमा: 61,008 करोड़ रुपये (9 जनवरी 2026 से प्रभावी); प्रस्तावित: 67,839 करोड़ रुपये (+11.2%)।
- एसडीएफ (स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी): सीएसएफ/जीआरएफ में राज्यों के योगदान और नीलामी ट्रेजरी बिलों में निवेश के बदले संपार्श्विक नकदी सहायता।
- उपयोग क्रम: पहले एसडीएफ, फिर डब्ल्यूएमए; डब्ल्यूएमए सीमा समाप्त होने पर ओवरड्राफ्ट सुविधा शुरू।
- प्रसाद समिति का गठन 30 अप्रैल को; रिपोर्ट आरबीआई ने मंगलवार को जारी की।
- सिफारिशें: लगातार ओवरड्राफ्ट 14→10 दिन, तिमाही सीमा 36→30 दिन, सीएसएफ के बदले एसडीएफ सीमा 50%→75%।
मेन्स दृष्टिकोण
राज्यों के बढ़ते बजट आकार के कारण आरबीआई से नकदी सहायता की मांग बढ़ रही है, जिसे देखते हुए प्रसाद समिति ने डब्ल्यूएमए राशि 61,008 करोड़ रुपये से 11.2 प्रतिशत बढ़ाकर 67,839 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। समिति ने साथ ही यह समस्या रेखांकित की कि कुछ राज्य नकदी सहायता के लिए आरबीआई पर अत्यधिक निर्भर हैं, जबकि कुछ आपात उधारी से बचने के लिए बहुत अधिक नकद शेष बनाए रखते हैं—इसलिए राज्यवार सीमा कुल व्यय की तुलना में राजस्व प्राप्तियों के आधार पर तय करने का सुझाव दिया गया है। नियम-आधारित अनुशासन के लिए वार्षिक समीक्षा में बढ़ोतरी 4 प्रतिशत तक सीमित रखने (पिछले तीन वर्षों के लेखों के आधार पर, मौजूदा सीमा में कटौती नहीं), लगातार ओवरड्राफ्ट के दिन 14 से 10 और तिमाही सीमा 36 से 30 दिन करने की सिफारिश है, ताकि ओवरड्राफ्ट पर निर्भरता हतोत्साहित हो। वहीं सीएसएफ में पात्र निवेश के बदले एसडीएफ सीमा 50 से 75 प्रतिशत करने तथा सीएसएफ/जीआरएफ के 5 प्रतिशत से अधिक शेष पर उच्च दर पर सहायता देने के प्रस्ताव राज्यों को अपने संचित कोषों का बेहतर उपयोग करने और ओवरड्राफ्ट के बजाय संपार्श्विक सहायता की ओर बढ़ने का रास्ता देते हैं। आगे की राह यह है कि सीमाएं राजकोषीय क्षमता से जुड़ें और नकदी प्रबंधन आरबीआई की सहायता के स्थान पर राज्यों के स्वयं के अनुशासन पर आधारित हो।
मुख्य शब्द
- वेज एंड मीन्स एडवांस (डब्ल्यूएमए)
- आरबीआई द्वारा राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को प्राप्तियों और भुगतानों के अस्थायी असंतुलन से निपटने के लिए दी जाने वाली नकदी सहायता।
- स्पेशल ड्रॉइंग फैसिलिटी (एसडीएफ)
- सीएसएफ/जीआरएफ में राज्यों के योगदान और नीलामी ट्रेजरी बिलों में निवेश के बदले आरबीआई की संपार्श्विक नकदी सहायता।
- कंसोलिडेटेड सिंकिंग फंड (सीएसएफ)
- राज्यों द्वारा कर्ज चुकाने के लिए बनाया गया कोष, जिसके निवेश के बदले एसडीएफ मिलती है।
- गारंटी रिडेम्पशन फंड (जीआरएफ)
- राज्यों द्वारा दी गई गारंटियों के निर्वहन के लिए बनाया कोष, जो एसडीएफ के लिए पात्र संपार्श्विक है।
- ओवरड्राफ्ट सुविधा
- डब्ल्यूएमए सीमा समाप्त होने पर सक्रिय होने वाली सुविधा; समिति ने इसके अनुमत दिन घटाने का सुझाव दिया है।
- प्रसाद समिति
- कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव आईएसएन प्रसाद की अध्यक्षता वाली समिति, जिसने डब्ल्यूएमए व्यवस्था की समीक्षा की।
अभ्यास प्रश्न
- राज्यों को आरबीआई की नकदी सहायता की व्यवस्था (डब्ल्यूएमए, एसडीएफ और ओवरड्राफ्ट) की व्याख्या करें और प्रसाद समिति की प्रमुख सिफारिशों का मूल्यांकन करें।
- क्या राज्यवार डब्ल्यूएमए सीमा राजस्व प्राप्तियों के आधार पर तय करना उचित है? पक्ष और विपक्ष में तर्क दें।
- ओवरड्राफ्ट के अनुमत दिनों में कटौती और सीएसएफ के बदले एसडीएफ सीमा बढ़ाने से राज्यों के नकदी प्रबंधन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।