जाति गणना के तरीके पर कर्नाटक उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने उठाए सवाल
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि जाति विवरण एकत्र करने का तरीका अधिक सटीक नहीं बनाया गया तो जाति गणना सामाजिक असमानताओं को दूर करने में विफल हो सकती है। उन्होंने केंद्र के क्रियान्वयन को संदेहास्पद बताया और उपेक्षित समुदायों को अवसर देने पर जोर दिया। कांग्रेस ने खुले प्रश्नों पर आपत्ति जताकर प्रमाणित जाति सूची की मांग की है, जयराम रमेश ने मानक ढांचा मांगा। खरगे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखा। गणना 2027 की जनगणना के साथ प्रस्तावित है।
स्रोत
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डेस्क जाँच · स्रोत से तुलना की
डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Karnataka Deputy CM G Parameshwara questioned the Centre's method of caste census collection. — Attributed to Parameshwara with direct quotes in the source.
- Congress wants the existing questionnaire withdrawn and a certified caste list prepared after consultations. — Attributed to the Congress party's stated position in the source.
- Jairam Ramesh argued respondents should not supply caste names without a standardised framework. — Attributed to Congress general secretary Jairam Ramesh in the source.
- Kharge and Rahul Gandhi wrote to PM Modi on August 20 over caste data collection. — Date and names appear in the source; no document cited.
- The Centre's caste enumeration is scheduled as part of the 2027 national Census. — Figure appears in source; no supporting official reference given.
विश्लेषकों की राय राय
जातिगत गणना को केंद्र ने अपने हाथ में ले लिया है, इसलिए असली लड़ाई अब इसके राजनीतिक श्रेय की है — परमेश्वर का बयान और जयराम रमेश की मांगें उसी रणनीति का हिस्सा दिखती हैं। कांग्रेस गणना का विरोध नहीं कर रही; वह तरीके पर सवाल उठाकर यह कथानक बनाए रखना चाहती है कि मांग उसकी थी और अमल केंद्र गलत ढंग से कर रहा है। कर्नाटक में दलित प्रतिनिधित्व से जुड़े उपमुख्यमंत्री का यह स्वर उठाना राज्य के राजनीतिक गणित के लिहाज़ से भी अहम है।
- 2027 की जनगणना में जातिगत गणना जोड़कर केंद्र ने कांग्रेस की मूल मांग को अपना बना लिया, जिससे पार्टी की लड़ाई 'हो या न हो' से 'कैसे हो' पर आ गई है।
- प्रमाणित जाति सूची और मानक प्रश्नावली की मांग तकनीकी लगती है, पर उसके केंद्र में यह राजनीतिक सवाल है कि अंतिम आंकड़ों पर नियंत्रण किसका होगा।
- तेलंगाना और बिहार के सर्वेक्षणों को मॉडल बताकर कांग्रेस अपनी राज्य सरकारों के काम को राष्ट्रीय मानक के रूप में पेश कर रही है।
- खड़गे–राहुल का पत्र, लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस और अब उपमुख्यमंत्री स्तर का बयान — यह किसी एक नेता की नाराज़गी नहीं, समन्वित पार्टी अभियान लगता है।
- केंद्र के नज़रिए से देखें तो आंकड़े आने से पहले प्रक्रिया पर आपत्ति राजनीतिक बीमा जैसी दिख सकती है — नतीजे प्रतिकूल निकलें तो प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा करने का आधार।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि केंद्र प्रश्नावली में बदलाव करता है या दलों से परामर्श पर राज़ी होता है, या कांग्रेस इसे 2027 तक चलने वाले सामाजिक न्याय के मुद्दे में बदल देती है।
इस खबर में केंद्र की प्रतिक्रिया, प्रश्नावली का सटीक स्वरूप और अन्य दलों का रुख नहीं है, और यह भी तय नहीं होता कि कांग्रेस की आपत्तियों से आंकड़ों की गुणवत्ता वाकई बदलेगी।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 3 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्र सरकार ने 2027 की राष्ट्रीय जनगणना के हिस्से के रूप में जाति गणना कराने का कार्यक्रम तय किया है। इस गणना में जाति का विवरण किस तरह दर्ज किया जाएगा, इस पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है और प्रमाणित जाति सूची की मांग की है। इसी संदर्भ में कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने केंद्र के क्रियान्वयन के तरीके पर सवाल उठाए हैं। विवाद का मूल यह है कि आंकड़े आगे प्रतिनिधित्व और अवसरों तक पहुंच के आकलन के लिए उपयोगी हों।
मुख्य तथ्य
- कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि जाति विवरण एकत्र करने का तरीका अधिक सटीक न हुआ तो गणना सामाजिक असमानताएं दूर करने में विफल हो सकती है।
- परमेश्वर के शब्दों में, "केंद्र सरकार जिस तरह जाति गणना लागू कर रही है, वह संदेहास्पद है।"
- कांग्रेस ने जाति गणना के लिए इस्तेमाल हो रहे प्रश्नावली (questionnaire) पर आपत्ति जताई है और खुले-अंत वाले (open ended) प्रश्नों का विरोध किया है।
- कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश का तर्क है कि मानकीकृत ढांचे के बिना उत्तरदाताओं को जाति के नाम भरने के लिए नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
- पार्टी चाहती है कि मौजूदा प्रश्नावली वापस ली जाए और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों व जनता से परामर्श के बाद नई तैयार की जाए।
- कांग्रेस ने तेलंगाना और बिहार में हुए जाति सर्वेक्षणों को इस गणना के लिए मॉडल बताया है।
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा।
- केंद्र की जाति गणना 2027 की राष्ट्रीय जनगणना के हिस्से के रूप में निर्धारित है।
समयरेखा
- 20 अगस्तमल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जाति विवरण एकत्र करने के तरीके पर चिंता जताई।
- पत्र के बाद (तारीख स्रोत में नहीं)कांग्रेस ने इस मुद्दे पर कई प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं; उपमुख्यमंत्री परमेश्वर ने केंद्र के तरीके पर सवाल उठाए।
- 2027राष्ट्रीय जनगणना के हिस्से के रूप में केंद्र की जाति गणना प्रस्तावित।
किसका दाँव
- जी परमेश्वर, कर्नाटक उपमुख्यमंत्री — उपेक्षित समुदायों को अवसर दिलाना; उनका कहना है कि गणना का मूल्यांकन इसी से हो कि वह वंचित समुदायों की मदद करती है या नहीं।
- केंद्र सरकार / प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी — 2027 की जनगणना के साथ जाति गणना कराने की जिम्मेदारी और प्रश्नावली के डिज़ाइन पर उठे सवालों का जवाब।
- कांग्रेस पार्टी (खरगे, राहुल गांधी, जयराम रमेश) — प्रमाणित जाति सूची और मानकीकृत ढांचे की मांग; ऐसे आंकड़े जो सरकारी नीति के लिए भरोसेमंद हों।
- उपेक्षित/वंचित समुदाय — प्रतिनिधित्व और अवसरों तक पहुंच का आकलन इसी आंकड़े पर निर्भर करेगा।
- तेलंगाना और बिहार — इन राज्यों के जाति सर्वेक्षणों को कांग्रेस मॉडल के रूप में पेश कर रही है।
क्यों अहम है
जाति गणना के आंकड़े आगे चलकर प्रतिनिधित्व और अवसरों तक पहुंच के आकलन तथा नीति निर्माण का आधार बनेंगे, इसलिए संग्रह की पद्धति ही परिणाम की विश्वसनीयता तय करेगी। कांग्रेस का तर्क है कि प्रमाणित सूची के बिना उत्तरदाताओं द्वारा जाति नाम भरने से अंतिम आंकड़ों में असंगतियां आ सकती हैं। परमेश्वर के अनुसार यदि 21वीं सदी में भी स्थिति वैसी ही रही, तो स्वतंत्रता का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- केंद्र की जाति गणना 2027 की राष्ट्रीय जनगणना के हिस्से के रूप में प्रस्तावित है।
- जी परमेश्वर — कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री, जिन्होंने केंद्र के क्रियान्वयन को "संदेहास्पद" कहा।
- जयराम रमेश — कांग्रेस महासचिव, जिन्होंने मानकीकृत ढांचे की मांग की।
- मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस अध्यक्ष) और राहुल गांधी (लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष) ने 20 अगस्त को पीएम मोदी को पत्र लिखा।
- कांग्रेस ने तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों को मॉडल बताया।
- कांग्रेस की मुख्य मांग — गणना शुरू होने से पहले प्रमाणित जाति सूची और नई प्रश्नावली।
मेन्स दृष्टिकोण
जाति गणना पर वर्तमान विवाद 'क्यों गिना जाए' से हटकर 'कैसे गिना जाए' पर केंद्रित हो गया है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर का तर्क है कि यदि जाति विवरण एकत्र करने की पद्धति अधिक सटीक नहीं बनाई गई, तो यह कवायद सामाजिक असमानताओं को दूर करने में विफल हो सकती है; उनके अनुसार उद्देश्य सभी को न्याय दिलाना और उपेक्षित समुदायों को अवसर देना है। कांग्रेस की आपत्ति खुले-अंत वाले प्रश्नों पर है — जयराम रमेश के अनुसार मानकीकृत ढांचे के बिना उत्तरदाताओं को जाति के नाम स्वयं भरने देना अंतिम आंकड़ों में असंगति पैदा कर सकता है, जिससे प्रतिनिधित्व और अवसरों तक पहुंच का आकलन कमजोर होगा। इसका निहितार्थ यह है कि दोषपूर्ण आंकड़े नीति-निर्माण को भी दोषपूर्ण बना देंगे। आगे का रास्ता जैसा स्रोत में सुझाया गया है: गणना शुरू होने से पहले अस्पष्टता घटाना — मौजूदा प्रश्नावली वापस लेकर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और जनता से परामर्श के बाद नई प्रश्नावली तथा प्रमाणित जाति सूची तैयार करना, और तेलंगाना व बिहार के जाति सर्वेक्षणों के अनुभव से सीखना।
मुख्य शब्द
- जाति गणना (Caste Census)
- जनगणना के साथ जाति विवरण एकत्र करने की कवायद, जो केंद्र द्वारा 2027 की राष्ट्रीय जनगणना के हिस्से के रूप में निर्धारित है।
- प्रमाणित जाति सूची (Certified List)
- सूचना एकत्र करने से पहले सरकार द्वारा तैयार जातियों की मान्य सूची, जिसकी कांग्रेस मांग कर रही है।
- खुले-अंत वाले प्रश्न (Open ended questions)
- ऐसे प्रश्न जिनमें उत्तरदाता स्वयं जाति का नाम लिखता है; कांग्रेस इन्हें असंगति का कारण मानती है।
- मानकीकृत ढांचा (Standardised framework)
- जाति दर्ज करने की एकरूप पद्धति, जिसकी मांग कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने की है।
- तेलंगाना और बिहार जाति सर्वेक्षण
- राज्यों द्वारा कराए गए जाति सर्वेक्षण, जिन्हें कांग्रेस राष्ट्रीय कवायद के लिए मॉडल बताती है।
- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष
- इस पद पर राहुल गांधी, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के साथ 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा।
अभ्यास प्रश्न
- जाति गणना में आंकड़े एकत्र करने की पद्धति ही उसकी उपयोगिता तय करती है। कांग्रेस की आपत्तियों के आलोक में परखें।
- "प्रमाणित जाति सूची के बिना जाति गणना के आंकड़े नीति-निर्माण के लिए अविश्वसनीय हो सकते हैं।" चर्चा करें।
- 2027 की जनगणना के साथ प्रस्तावित जाति गणना में राज्यों (जैसे तेलंगाना, बिहार) के सर्वेक्षण अनुभवों की क्या भूमिका हो सकती है?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
