ग्रीनलैंड में दो ठिकानों पर अमेरिकी सैन्य मौजूदगी की योजना: रिपोर्ट
अमेरिका दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सरसुआक में शीत युद्ध कालीन ठिकाना फिर से खोलने की योजना बना रहा है, जहां उसने 1950 के दशक तक ब्लूई वेस्ट वन संचालित किया था, और पूर्वी तट पर मेस्टर्सविग में सैन्य मौजूदगी स्थापित करेगा, रॉयटर्स ने बताया। मेस्टर्सविग का इस्तेमाल अभी डेनमार्क की सीरियस डॉग स्लेज पैट्रोल करती है। यह कदम अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच सुरक्षा समझौते का हिस्सा होगा, जिस पर मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हस्ताक्षर होंगे। समझौते का पाठ सार्वजनिक नहीं किया गया है।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- The US plans to reopen Narsarsuaq, site of the former Bluie West One base, and establish a presence at Mestersvig. — Attributed to Reuters, citing two anonymous sources; source text notes details are not finalised.
- A security agreement between the US, Denmark and Greenland is to be signed Tuesday at 10:30 a.m. ET (1430 GMT) at the UN General Assembly in New York. — Time and venue appear in the source but come from unnamed sources; agreement text not made public.
- Denmark, Greenland and the White House did not immediately respond to requests for comment. — Stated in source; no confirmation or denial from officials available.
- The US operated 17 installations with over 10,000 personnel in Greenland during the Cold War; today only Pituffik Space Base remains with about 150 personnel. — Figures appear in source as background, with no specific attribution given.
- Trump has said he wants US control of Greenland and has not ruled out military or economic force. — Reported in source as background on public statements; no direct quote provided.
विश्लेषकों की राय राय
इस समझौते को उस राजनीतिक मांग — कि अमेरिका ग्रीनलैंड को "नियंत्रित" करे — को सहयोगी ढांचे के भीतर फिट होने वाली सैन्य पहुंच में बदलने की कोशिश के रूप में देखा जाना चाहिए। नार्सर्सुआक को फिर खोलना और मेस्टर्सविग में उपस्थिति बनाना अमेरिकी पदचिह्न को, जो अब तक एकमात्र पिटुफिक अड्डे तक सीमित था, द्वीप के दक्षिणी और पूर्वी तट तक ले जाएगा। डेनमार्क के लिए यह संप्रभुता बचाते हुए दबाव कम करने का रास्ता है; वाशिंगटन के लिए आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक पर निगरानी का दायरा बढ़ाने का अवसर। पाठ सार्वजनिक न होने के कारण असली सवाल — नियंत्रण किसके हाथ में — अनुत्तरित है।
- शीत युद्ध काल की 17 प्रतिष्ठानों और 10,000 से अधिक जवानों वाली उपस्थिति आज सिर्फ पिटुफिक और करीब 150 जवानों तक सिमट गई है, इसलिए दो नए ठिकाने संख्या में छोटे पर दिशा में साफ संकेत हैं।
- उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड की स्थिति और आर्कटिक तथा उत्तरी अटलांटिक गतिविधियों की निगरानी में उसका महत्व ही इस विस्तार को सामरिक वजन देता है।
- डेनमार्क का यह आग्रह कि आर्कटिक सुरक्षा नाटो के ढांचे में रहे, सोचा-समझा है — यह द्विपक्षीय दबाव को बहुपक्षीय जिम्मेदारी में बदलकर संप्रभुता के विवाद को नरमी से किनारे कर देता है।
- मेस्टर्सविग का इस्तेमाल अभी डेनमार्क के विशेष बल सिरियस डॉग स्लेड पेट्रोल करता है, इसलिए वहां साझा उपस्थिति और कमान का ढांचा एक संवेदनशील बिंदु है।
- चूंकि ट्रंप के बलप्रयोग से इनकार न करने पर नाटो के भीतर कूटनीतिक संकट खड़ा हुआ था, इस समझौते को तनाव घटाने के कदम या दबाव के नतीजे — दोनों तरह से पढ़ा जा सकता है।
किस पर नज़र रखें — देखना यह है कि हस्ताक्षर के बाद समझौते का पाठ सार्वजनिक होता है या नहीं — तैनाती का आकार व अवधि, कमान किसके पास, ग्रीनलैंड को कोई वीटो है क्या — और नाटो सहयोगी, रूस व चीन कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।
यह रॉयटर्स की उन सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट है जिन्होंने नाम न छापने की शर्त रखी; पाठ सार्वजनिक नहीं है, सूत्रों ने ही कहा कि ब्योरा अंतिम नहीं है और बदल सकता है, तैनाती का स्वरूप व पैमाना स्पष्ट नहीं, और डेनमार्क, ग्रीनलैंड तथा व्हाइट हाउस की तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 5 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने जा रहा है — दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सरसुआक में शीत युद्ध कालीन ठिकाना (ब्लूई वेस्ट वन) फिर खोलना और पूर्वी तट पर मेस्टर्सविग में मौजूदगी स्थापित करना। यह अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक नए सुरक्षा समझौते का हिस्सा बताया गया है, जिस पर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मंगलवार को हस्ताक्षर होने की संभावना है। ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और उत्तरी अमेरिका व यूरोप के बीच रणनीतिक रूप से अहम स्थान पर है। यह समझौता राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के महीनों के दबाव के बाद आ रहा है, जिन्होंने बार-बार ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही है।
मुख्य तथ्य
- अमेरिका दक्षिणी ग्रीनलैंड के नार्सरसुआक में पुराना शीत युद्ध कालीन ठिकाना फिर खोलने की योजना बना रहा है, जहां 1950 के दशक तक ब्लूई वेस्ट वन सैन्य अड्डा चलाया गया था।
- दूसरा स्थल पूर्वी तट पर मेस्टर्सविग है, जिसका इस्तेमाल अभी डेनमार्क के विशेष बल यूनिट सीरियस डॉग स्लेज पैट्रोल द्वारा किया जाता है।
- अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच समझौते पर मंगलवार सुबह 10:30 बजे ET (1430 GMT) न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
- समझौते का पाठ सार्वजनिक नहीं किया गया है; सूत्रों के अनुसार ब्योरा अंतिम नहीं है और हस्ताक्षर से पहले बदल सकता है।
- शीत युद्ध के दौरान अमेरिका ग्रीनलैंड में 17 सैन्य प्रतिष्ठान चलाता था और 10,000 से अधिक कर्मी तैनात थे।
- आज ग्रीनलैंड में अमेरिका का एकमात्र प्रतिष्ठान पिटुफिक स्पेस बेस है, जहां लगभग 150 अमेरिकी सैन्यकर्मी हैं।
- डेनमार्क का कहना है कि नया समझौता आर्कटिक सुरक्षा को नाटो के ढांचे में रखेगा, न कि केवल अमेरिका और डेनमार्क की जिम्मेदारी पर छोड़ेगा।
- ट्रंप की धमकियां जनवरी में तेज हुईं, जिससे नाटो के भीतर कूटनीतिक संकट पैदा हुआ; उन्होंने सैन्य या आर्थिक दबाव के इस्तेमाल से इनकार करने से कभी-कभी परहेज किया।
समयरेखा
- 1950 के दशक तकअमेरिका ने नार्सरसुआक में ब्लूई वेस्ट वन सैन्य ठिकाना संचालित किया।
- शीत युद्ध कालग्रीनलैंड में अमेरिका के 17 सैन्य प्रतिष्ठान और 10,000 से अधिक कर्मी थे।
- जनवरीग्रीनलैंड पर नियंत्रण को लेकर ट्रंप की धमकियां तेज हुईं, नाटो के भीतर कूटनीतिक संकट पैदा हुआ।
- इसके बाद के महीनेडेनमार्क और ग्रीनलैंड ने तनाव कम करने के लिए वाशिंगटन से बातचीत की।
- मंगलवार, 10:30 बजे ET (1430 GMT)न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर की संभावना।
किसका दाँव
- अमेरिका — आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक में निगरानी तथा सैन्य पदचिह्न का विस्तार; नार्सरसुआक और मेस्टर्सविग में मौजूदगी।
- डेनमार्क — अपने अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र पर संप्रभुता और आर्कटिक सुरक्षा को नाटो ढांचे में लाना।
- ग्रीनलैंड सरकार — अपनी भूमि पर विदेशी सैन्य उपस्थिति और अर्ध-स्वायत्त दर्जे से जुड़े निर्णयों में हिस्सेदारी।
- नाटो — सदस्य देशों के बीच तनाव के बाद आर्कटिक सुरक्षा की सामूहिक जिम्मेदारी।
- सीरियस डॉग स्लेज पैट्रोल (डेनिश विशेष बल) — मेस्टर्सविग चौकी का वर्तमान उपयोगकर्ता, जहां अमेरिकी मौजूदगी प्रस्तावित है।
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप — ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की घोषित मंशा और दबाव की रणनीति का परिणाम।
क्यों अहम है
ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित है और आर्कटिक तथा उत्तरी अटलांटिक में गतिविधियों की निगरानी के लिए अहम है, इसलिए वहां अमेरिकी सैन्य विस्तार वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करता है। यह मामला दिखाता है कि एक सहयोगी देश पर दबाव से नाटो के भीतर भी कूटनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। समझौते का पाठ सार्वजनिक न होना पारदर्शिता और अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र की सहमति से जुड़े सवाल उठाता है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- नार्सरसुआक (दक्षिण ग्रीनलैंड) में अमेरिका ने 1950 के दशक तक ब्लूई वेस्ट वन ठिकाना चलाया।
- मेस्टर्सविग पूर्वी ग्रीनलैंड में है, वर्तमान में डेनमार्क की सीरियस डॉग स्लेज पैट्रोल के उपयोग में।
- पिटुफिक स्पेस बेस ग्रीनलैंड में अमेरिका का एकमात्र मौजूदा सैन्य प्रतिष्ठान; लगभग 150 कर्मी।
- शीत युद्ध में अमेरिका के ग्रीनलैंड में 17 प्रतिष्ठान और 10,000+ कर्मी थे।
- ग्रीनलैंड डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है; डेनमार्क आर्कटिक सुरक्षा को नाटो ढांचे में रखने का पक्षधर।
- समझौते पर हस्ताक्षर संयुक्त राष्ट्र महासभा (न्यूयॉर्क) के इतर मंगलवार को प्रस्तावित।
मेन्स दृष्टिकोण
रॉयटर्स के अनुसार अमेरिका का नार्सरसुआक ठिकाना फिर खोलना और मेस्टर्सविग में उपस्थिति बनाना ग्रीनलैंड को लेकर बदलती आर्कटिक भू-राजनीति का संकेत है। इसके तात्कालिक कारण स्पष्ट हैं: राष्ट्रपति ट्रंप का महीनों का दबाव, जिसमें ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात और सैन्य या आर्थिक साधनों से इनकार न करना शामिल रहा, जिससे जनवरी के बाद नाटो के भीतर कूटनीतिक संकट पैदा हुआ और डेनमार्क तथा ग्रीनलैंड को वाशिंगटन से बातचीत करनी पड़ी। निहितार्थ दो स्तरों पर हैं — रणनीतिक, क्योंकि ग्रीनलैंड उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच स्थित होने के कारण आर्कटिक व उत्तरी अटलांटिक की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण है; और संस्थागत, क्योंकि डेनमार्क इस सुरक्षा जिम्मेदारी को केवल द्विपक्षीय रखने के बजाय नाटो ढांचे में लाना चाहता है, जो सहयोगी के दबाव को बहुपक्षीय नियमों में बांधने की कोशिश है। आगे का रास्ता पारदर्शिता और सहमति पर निर्भर करेगा: समझौते का पाठ सार्वजनिक नहीं है, ब्योरा अंतिम नहीं है और तैनाती का पैमाना व स्वरूप स्पष्ट नहीं, इसलिए ग्रीनलैंड की अर्ध-स्वायत्त सरकार की भागीदारी, नाटो की सामूहिक रूपरेखा और स्पष्ट रूप से परिभाषित सैन्य उपस्थिति ही तनाव घटा सकती है।
मुख्य शब्द
- ब्लूई वेस्ट वन
- नार्सरसुआक (दक्षिण ग्रीनलैंड) में अमेरिका द्वारा 1950 के दशक तक संचालित शीत युद्ध कालीन सैन्य ठिकाना।
- मेस्टर्सविग
- पूर्वी ग्रीनलैंड की चौकी, जिसका उपयोग अभी डेनमार्क की सीरियस डॉग स्लेज पैट्रोल करती है।
- सीरियस डॉग स्लेज पैट्रोल
- डेनमार्क का विशेष बल यूनिट, जो ग्रीनलैंड में गश्त करता है।
- पिटुफिक स्पेस बेस
- ग्रीनलैंड में अमेरिका का एकमात्र वर्तमान सैन्य प्रतिष्ठान, लगभग 150 अमेरिकी सैन्यकर्मियों के साथ।
- अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र
- ग्रीनलैंड की स्थिति — डेनमार्क के अधीन, पर आंतरिक मामलों में स्वायत्तता प्राप्त।
- नाटो
- उत्तर अटलांटिक संधि संगठन; डेनमार्क आर्कटिक सुरक्षा को इसके ढांचे में रखना चाहता है।
अभ्यास प्रश्न
- आर्कटिक की बदलती भू-राजनीति में ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व की चर्चा करें और वहां अमेरिकी सैन्य उपस्थिति के विस्तार के निहितार्थ बताएं।
- क्या किसी सहयोगी देश के क्षेत्र पर दबाव डालना गठबंधन की एकता को कमजोर करता है? अमेरिका–डेनमार्क–ग्रीनलैंड प्रकरण के संदर्भ में परीक्षण करें।
- अर्ध-स्वायत्त क्षेत्रों से जुड़े सुरक्षा समझौतों में पारदर्शिता और स्थानीय सहमति क्यों आवश्यक है? उदाहरण सहित समझाएं।
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।