संजुक्ता पराशर सीआरपीएफ की कोबरा इकाई की पहली महिला प्रमुख बनीं
2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर (47) सीआरपीएफ की उग्रवाद-रोधी और असममित युद्ध इकाई कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन (कोबरा) का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बन गई हैं। शुक्रवार को उन्हें कोबरा महानिरीक्षक नियुक्त किया गया; उन्होंने 1996 बैच के अधिकारी दानिश राणा का स्थान लिया। अगस्त से वे सीआरपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर हैं। मीडिया द्वारा 'आयरन लेडी' कहलाईं पराशर ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद-रोधी अभियानों का नेतृत्व किया, असम पुलिस अधीक्षक और राज्य सीआईडी प्रमुख रहीं तथा एनआईए में भी सेवा दी।
स्रोत
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डेस्क ने क्या जाँचा (5)
- Sanjukta Parashar, 47, a 2006 batch Assam-Meghalaya cadre IPS officer, is the first woman to head CRPF's CoBRA unit. — Central claim of the source; stated as fact with no named official source, though appointment details (named IG on Friday) appear in the source.
- She replaced 1996 batch IPS officer Danish Rana as CoBRA inspector general and has been on deputation with the CRPF since August. — Specific detail appears in source text; no attribution given.
- Conflict in Manipur since May 2023 has left over 306 people dead and 49 missing. — Figures appear in the source without attribution to any agency or official.
- Amit Shah told Parliament the March 31 deadline for ending Maoism was met, with 4,839 surrenders, 706 killed and 2,218 arrested in three years. — Attributed to the Union home minister's statement in Parliament.
- CRPF announced in May plans to raise an 11th CoBRA battalion for counter-terror operations in Jammu and Kashmir. — Attributed to the CRPF; figure appears in source.
विश्लेषकों की राय राय
संजुक्ता पराशर की नियुक्ति मूलतः एक पेशेवर पोस्टिंग है, लेकिन इसका राजनीतिक संकेत छोटा नहीं है — सुरक्षा तंत्र की सबसे कठिन इकाई की कमान पहली बार किसी महिला अधिकारी के हाथ में आना केंद्र को महिला सशक्तीकरण और आंतरिक सुरक्षा को एक ही कथानक में जोड़ने का अवसर देता है। समय भी अहम है: यह उस दौर में हुआ है जब केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद में माओवाद-विरोधी लक्ष्य पूरा होने की बात कही और कोबरा का ध्यान मणिपुर तथा जम्मू-कश्मीर की ओर मुड़ रहा है। पूर्वोत्तर में उग्रवाद-विरोधी अनुभव रखने वाली असम कैडर की अधिकारी को चुनना बताता है कि क्षेत्रीय विशेषज्ञता को अहमियत दी गई है।
- 'पहली महिला कोबरा आईजी' का पहलू सरकार के लिए सकारात्मक प्रतीकात्मक मूल्य रखता है और बलों में महिलाओं की भूमिका की बहस को मजबूती देता है।
- जब केंद्र माओवाद के खात्मे का दावा कर रहा है, तब यह नियुक्ति कोबरा को नए मोर्चों के लिए तैयार करने की कवायद के रूप में देखी जा सकती है।
- मणिपुर में दो कोबरा बटालियन और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रस्तावित 11वीं बटालियन, दोनों राजनीतिक रूप से संवेदनशील मोर्चे हैं और वहीं के नतीजे इस नियुक्ति की असली कसौटी होंगे।
- पूर्वोत्तर के अनुभव के साथ एनआईए और राज्य सीआईडी में काम कर चुकी अधिकारी का चयन क्षेत्रीय ज़मीनी समझ को दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है।
- 1996 बैच के अधिकारी की जगह 2006 बैच की अधिकारी का आना संकेत देता है कि वरिष्ठता से ऊपर विशिष्ट दक्षता को तरजीह मिली, जो सेवा हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है।
किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि मणिपुर में कोबरा के अभियान किस दिशा में बढ़ते हैं, जम्मू-कश्मीर की नई बटालियन कितनी तेज़ी से खड़ी होती है, और सरकार इस नियुक्ति को राजनीतिक रूप से कितना आगे रखती है।
यह खबर न तो नियुक्ति के पीछे किसी राजनीतिक मंशा को स्थापित करती है, न किसी नीतिगत बदलाव को, और इसमें किसी दल की प्रतिक्रिया या सरकारी स्पष्टीकरण भी नहीं है।
गहराई से
शोध सारांश · 8 तथ्य · 7 तारीख़ें · परीक्षा के लिएसार
पृष्ठभूमि
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विशेष उग्रवाद-रोधी तथा असममित युद्ध इकाई 'कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन' (कोबरा) का गठन 2008 में माओवादी उग्रवाद के चरम पर जंगल युद्ध के लिए किया गया था। 2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर (47) को शुक्रवार को इस इकाई की महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया गया और वे कोबरा का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बन गईं। उन्होंने 1996 बैच के अधिकारी दानिश राणा का स्थान लिया, जो अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और संघ राज्यक्षेत्र कैडर के आईपीएस हैं। पराशर की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब कोबरा की दो बटालियन जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में तैनात की गई हैं।
मुख्य तथ्य
- संजुक्ता पराशर (47) 2006 बैच की असम-मेघालय कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं और कोबरा का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।
- उन्हें शुक्रवार को कोबरा महानिरीक्षक (आईजी) नामित किया गया; अगस्त से वे सीआरपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर हैं।
- उन्होंने 1996 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम व संघ राज्यक्षेत्र कैडर के आईपीएस अधिकारी दानिश राणा का स्थान लिया।
- कोबरा का गठन 2008 में माओवादी उग्रवाद के चरम पर जंगल युद्ध के लिए किया गया था।
- केंद्र सरकार ने कोबरा की दो बटालियन मणिपुर भेजी थीं, जहाँ मई 2023 से जारी संघर्ष में 306 से अधिक लोग मारे गए और 49 लापता हैं।
- गृह मंत्री अमित शाह ने इस वर्ष संसद में बताया कि माओवाद समाप्त करने की 31 मार्च की समय-सीमा पूरी हुई।
- तीन वर्षों के तेज माओवाद-रोधी अभियानों में 4,839 उग्रवादियों ने आत्मसमर्पण किया, 706 मारे गए और 2,218 गिरफ्तार हुए।
- मई में सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों के लिए 11वीं कोबरा बटालियन खड़ी करने की योजना घोषित की।
समयरेखा
- 2006संजुक्ता पराशर आईपीएस में असम-मेघालय कैडर में शामिल हुईं।
- 2008माओवादी उग्रवाद के चरम पर जंगल युद्ध के लिए कोबरा इकाई का गठन।
- मई 2023मणिपुर में जातीय हिंसा शुरू; अब तक 306 से अधिक मौतें और 49 लोग लापता।
- 31 मार्च (इस वर्ष)देशभर में माओवाद समाप्त करने की सरकार द्वारा तय समय-सीमा, जिसे पूरा बताया गया।
- मई (इस वर्ष)सीआरपीएफ ने जम्मू-कश्मीर के लिए 11वीं कोबरा बटालियन खड़ी करने की योजना की घोषणा की।
- अगस्त (इस वर्ष)पराशर सीआरपीएफ में प्रतिनियुक्ति पर आईं।
- शुक्रवारपराशर कोबरा महानिरीक्षक नामित हुईं, दानिश राणा का स्थान लिया।
किसका दाँव
- संजुक्ता पराशर — कोबरा की पहली महिला प्रमुख; पूर्वोत्तर में उग्रवाद-रोधी अभियानों का अनुभव, मीडिया में 'आयरन लेडी' कही गईं।
- सीआरपीएफ — अर्धसैनिक बल, जिसके अधीन कोबरा इकाई है; जम्मू-कश्मीर के लिए 11वीं बटालियन खड़ी करने की योजना।
- कोबरा कमांडो — मणिपुर में उग्रवादियों को पकड़ने और पुलिस शस्त्रागारों से लूटे हथियार बरामद करने के छापे चला रहे हैं।
- केंद्रीय गृह मंत्रालय / गृह मंत्री अमित शाह — माओवाद-रोधी अभियान की समय-सीमा और बल की तैनाती संबंधी नीतिगत जिम्मेदारी।
- मणिपुर के लोग — मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष में 306 से अधिक मौतें, 49 लापता; सुरक्षा बहाली पर निर्भरता।
- दानिश राणा — 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी, जिनका स्थान पराशर ने कोबरा आईजी के रूप में लिया।
क्यों अहम है
कोबरा जैसी विशिष्ट लड़ाकू इकाई की कमान पहली बार किसी महिला अधिकारी को मिलना केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नेतृत्व के दायरे के विस्तार का संकेत है। यह नियुक्ति ऐसे मोड़ पर हुई है जब सरकार माओवाद-रोधी अभियान की समाप्ति की घोषणा कर चुकी है और कोबरा की भूमिका मणिपुर के जातीय संघर्ष तथा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों की ओर मुड़ रही है।
UPSC नज़रिया
प्रीलिम्स संकेत
- कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन) सीआरपीएफ की विशेष उग्रवाद-रोधी व असममित युद्ध इकाई है, गठन 2008।
- संजुक्ता पराशर – 2006 बैच, असम-मेघालय कैडर आईपीएस; कोबरा की पहली महिला महानिरीक्षक।
- माओवाद समाप्ति की घोषित समय-सीमा: 31 मार्च; तीन वर्षों में 4,839 आत्मसमर्पण, 706 मारे गए, 2,218 गिरफ्तार।
- मई 2023 से मणिपुर हिंसा में 306 से अधिक मृत, 49 लापता।
- मई में जम्मू-कश्मीर हेतु 11वीं कोबरा बटालियन खड़ी करने की योजना घोषित।
- एनआईए – संघीय आतंकवाद-रोधी विधि प्रवर्तन व जाँच एजेंसी, जिसमें पराशर ने सेवा दी।
मेन्स दृष्टिकोण
भारत के आंतरिक सुरक्षा ढाँचे में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की विशिष्ट इकाइयाँ निर्णायक भूमिका निभाती हैं; कोबरा को 2008 में माओवादी उग्रवाद के चरम पर जंगल युद्ध के लिए खड़ा किया गया और स्रोत के अनुसार इसने वामपंथी उग्रवाद की समाप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई—गृह मंत्री ने संसद में बताया कि 31 मार्च की समय-सीमा पूरी हुई, जिसमें तीन वर्षों में 4,839 आत्मसमर्पण, 706 उग्रवादी मारे गए और 2,218 गिरफ्तार हुए। अब इकाई की तैनाती का केंद्र बदल रहा है: दो बटालियन मणिपुर भेजी गई हैं जहाँ मई 2023 से जातीय संघर्ष में 306 से अधिक मौतें व 49 लोग लापता हैं और कमांडो लूटे गए हथियार बरामद करने के लिए छापे चला रहे हैं, तथा मई में जम्मू-कश्मीर के लिए 11वीं बटालियन खड़ी करने की योजना घोषित हुई। इस पृष्ठभूमि में 2006 बैच की आईपीएस संजुक्ता पराशर की कोबरा आईजी के रूप में नियुक्ति दो अर्थ रखती है—एक, पूर्वोत्तर के उग्रवाद-रोधी अनुभव, असम पुलिस अधीक्षक, राज्य सीआईडी प्रमुख तथा एनआईए में सेवा से बना विशेषज्ञता-आधारित नेतृत्व; दूसरा, वर्दीधारी बलों की अग्रिम पंक्ति की कमान में महिलाओं की भागीदारी का विस्तार। आगे की राह के रूप में स्रोत केवल यही संकेत देता है कि कोबरा की क्षमता का पुनर्नियोजन संघर्ष-क्षेत्रों की बदलती प्रकृति के अनुरूप किया जा रहा है; इससे आगे की नीतिगत बात स्रोत में नहीं है।
मुख्य शब्द
- कोबरा (CoBRA)
- कमांडो बटालियन फॉर रेजोल्यूट एक्शन – सीआरपीएफ की विशेष उग्रवाद-रोधी और असममित युद्ध इकाई, 2008 में गठित।
- सीआरपीएफ
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल – अर्धसैनिक बल, जिसके अंतर्गत कोबरा बटालियनें आती हैं।
- असममित युद्ध
- असमान क्षमता वाले पक्षों के बीच अपरंपरागत लड़ाई; कोबरा इसी तरह के अभियानों व जंगल युद्ध के लिए प्रशिक्षित है।
- एनआईए
- राष्ट्रीय जाँच एजेंसी – संघीय आतंकवाद-रोधी विधि प्रवर्तन व जाँच एजेंसी, जिसमें पराशर ने सेवा दी।
- वामपंथी उग्रवाद (माओवाद)
- माओवादी सशस्त्र विद्रोह, जिसके विरुद्ध अभियानों में कोबरा की मुख्य भूमिका रही।
- प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन)
- राज्य कैडर का अधिकारी सीमित अवधि के लिए केंद्रीय संगठन में सेवा देता है; पराशर अगस्त से सीआरपीएफ में हैं।
अभ्यास प्रश्न
- कोबरा जैसी विशेष इकाइयों ने भारत में वामपंथी उग्रवाद के प्रतिरोध में क्या भूमिका निभाई है? स्रोत में दिए आँकड़ों के आधार पर मूल्यांकन कीजिए।
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की अग्रिम पंक्ति की कमान में महिला अधिकारियों की भागीदारी का क्या महत्व है? संजुक्ता पराशर की नियुक्ति के संदर्भ में चर्चा कीजिए।
- मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय संघर्ष और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी आवश्यकताओं के बीच केंद्रीय बलों के पुनर्नियोजन की चुनौतियाँ क्या हैं?
सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।
