राजनीति तमिलनाडु

उपचुनाव पर सीपीआई(एम) ने टीवीके पर साधा निशाना

तमिलनाडु की सत्तारूढ़ टीवीके को बाहर से समर्थन दे रही सीपीआई(एम) ने आरोप लगाया कि पार्टी ने राजनीतिक लाभ के लिए मतदाताओं पर उपचुनाव थोपा है। वरिष्ठ नेता पी षणमुगम ने कहा कि एआईएडीएमके के टिकट पर जीते कुमारवेल और सत्यभामा के इस्तीफे और टीवीके में शामिल होने से मदुरांतकम व धारापुरम में उपचुनाव हुए, जहां टीवीके ने उन्हें ही उतारा। उन्होंने कहा कि मतदाता टीवीके उम्मीदवारों का विरोध कर रहे हैं, पर वाम समर्थन जारी रहेगा।

स्रोत

Left (CPI-M) · मूल ख़बर पढ़ें ↗

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डेस्क जाँच · कुछ दावे ध्यान से पढ़ें

डेस्क ने क्या जाँचा (5)
  • Bypolls in Madurantakam and Dharapuram were necessitated by the resignation of two AIADMK MLAs who joined TVK — Stated as fact in the source; names Kumaravel and Sathyabama appear in the source text.
  • The election was 'forcibly imposed on the people' for political gain — Directly quoted allegation attributed to P Shanmugam; not independently verified.
  • TVK candidates are being 'chased away by voters' and results will not favour TVK — Unsubstantiated claim attributed to Shanmugam; no data or source given.
  • CPI(M) continues outside support to the TVK government despite differences — Attributed to Shanmugam in the source.
  • CPI(M) protested in Chennai on September 19 against a new Secretariat-Assembly complex at Foreshore Estate — Date and location appear in the source; attributed to the party.

विश्लेषकों की राय राय

AI राजनीतिक विश्लेषक

यह गठजोड़ टूटने का संकेत नहीं, मोलभाव की ताकत बढ़ाने की कोशिश है। टीवीके सरकार को बाहर से समर्थन जारी रखते हुए उपचुनाव अलग लड़कर सीपीआई(एम) ने ऐसी जगह बना ली है जहाँ नतीजे अच्छे रहें तो श्रेय में हिस्सा, और खराब रहें तो 'हमने पहले कहा था' का दावा। मदुरांतकम और धारापुरम के चुनाव को जनता पर 'जबरन थोपा गया' बताना सीधे उस साफ-सुथरी राजनीति की छवि पर चोट है जिसे टीवीके पेश करती है — लेकिन समर्थन जारी रहने की स्पष्टता बताती है कि मकसद दबाव है, सरकार गिराना नहीं।

  • समर्थन वापस न लेकर भी हमला करना दबाव की राजनीति है — इससे नीतिगत मुद्दों पर वामपंथ की अनदेखी की कीमत बढ़ती है और अलग पहचान भी बची रहती है।
  • एआईएडीएमके के टिकट पर जीतकर इस्तीफा देने, टीवीके में जाने और उसी सीट से फिर लड़ने वाले दो नेता दलबदल के आरोप का सबसे आसान निशाना हैं — यही तर्क एआईएडीएमके भी उठा सकती है।
  • उपचुनाव पर टिप्पणी पहले से दिख रहे मतभेदों की कड़ी है: प्रस्तावित सचिवालय-विधानसभा परिसर, सीवरेज परियोजनाओं का पीपीपी निजीकरण, और डीएमके से जुड़ी भ्रष्टाचार फाइलें।
  • नतीजे टीवीके के पक्ष में 'निश्चित रूप से' नहीं होंगे — यह षण्मुगम का राजनीतिक अनुमान है, प्रमाण नहीं; सही निकले तो वामपंथ की सौदेबाजी मजबूत होगी, वरना उसकी आलोचना कमजोर पड़ेगी।
  • जिस सरकार को समर्थन दे रही हो उसकी आलोचना करते हुए चुनाव अलग लड़ना तमिलनाडु में वामपंथ का पुराना तरीका है, जिससे बड़े गठबंधन के भीतर अपना वोट आधार बचा रहता है।

किस पर नज़र रखें — देखना होगा कि मदुरांतकम और धारापुरम के नतीजों के बाद सीपीआई(एम) अपने बाहरी समर्थन पर शर्तें जोड़ती है या नहीं, और टीवीके नेता वामपंथ पर कितना तीखा पलटवार करते हैं।

यह खबर यह स्थापित नहीं करती कि वामपंथी दल समर्थन वापस लेंगे; दोनों विधायकों से इस्तीफे से पहले कथित वादों का कोई सबूत इसमें नहीं है, और टीवीके की प्रतिक्रिया भी दर्ज नहीं है।

गहराई से

शोध सारांश · 8 तथ्य · 4 तारीख़ें · परीक्षा के लिए

सार

पृष्ठभूमि

तमिलनाडु में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सत्ता में है और वाम दल, जिनमें सीपीआई(एम) शामिल है, उसे बाहर से समर्थन दे रहे हैं। मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर उपचुनाव इसलिए जरूरी हुए क्योंकि एआईएडीएमके के टिकट पर जीते दो विधायक कुमारवेल और सत्यभामा ने इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हो गए और अब वही टीवीके उम्मीदवार हैं। सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता पी षणमुगम ने आरोप लगाया है कि यह चुनाव राजनीतिक लाभ के लिए जनता पर जबरन थोपा गया है, जिससे वाम दलों और टीवीके के बीच मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।

मुख्य तथ्य

  • दो निर्वाचन क्षेत्रों — मदुरांतकम और धारापुरम — में उपचुनाव एआईएडीएमके के दो विधायकों के इस्तीफे के बाद जरूरी हुए।
  • इस्तीफा देने वाले दोनों नेता कुमारवेल और सत्यभामा जीत के कुछ समय बाद एआईएडीएमके छोड़कर टीवीके में शामिल हुए; टीवीके ने उन्हीं को उम्मीदवार बनाया।
  • एआईएडीएमके ने दोनों सीटों पर नए उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि वाम दल बाहरी समर्थन के बावजूद अलग से चुनाव लड़ रहे हैं।
  • षणमुगम का दावा: "यह चुनाव लोगों पर जबरन थोपा गया है" और परिणाम "निश्चित रूप से" टीवीके के पक्ष में नहीं होंगे।
  • षणमुगम ने कहा कि टीवीके का केवल दो दिन प्रचार करने का निर्णय पार्टी की कमजोरी दर्शाता है।
  • 19 सितंबर को सीपीआई(एम) ने चेन्नई में मरीना तट के पास फोरशोर एस्टेट में नए सचिवालय-विधानसभा परिसर के प्रस्ताव के विरुद्ध प्रदर्शन किया।
  • सीपीआई(एम) ने मदुरै और नागरकोइल निगमों में भूमिगत सीवरेज परियोजनाओं के पीपीपी मॉडल से निजीकरण के टेंडर तत्काल रद्द करने की मांग की।
  • आलोचना के बावजूद षणमुगम ने कहा कि टीवीके को बाहर से समर्थन देने पर वाम दलों का रुख अपरिवर्तित है।

समयरेखा

  1. उपचुनाव से पहले (तिथि स्रोत में नहीं)एआईएडीएमके के टिकट पर जीते कुमारवेल और सत्यभामा ने इस्तीफा देकर टीवीके में शामिल हुए, जिससे दो सीटें खाली हुईं।
  2. 19 सितंबरसीपीआई(एम) ने चेन्नई में फोरशोर एस्टेट में प्रस्तावित सचिवालय-विधानसभा परिसर के खिलाफ प्रदर्शन किया।
  3. हाल ही में (बुधवार)सीपीआई(एम) ने बयान जारी कर मदुरै व नागरकोइल के सीवरेज निजीकरण टेंडर रद्द करने की मांग की।
  4. आगामी उपचुनाव से पहलेषणमुगम ने टीवीके पर जनता पर चुनाव थोपने का आरोप लगाया, पर बाहरी समर्थन जारी रखने की बात दोहराई।

किसका दाँव

  • सीपीआई(एम) / वाम दल — टीवीके सरकार को बाहरी समर्थन जारी रखते हुए उपचुनाव में अलग से लड़ना — विश्वसनीयता और राजनीतिक स्वायत्तता दोनों दांव पर।
  • टीवीके और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय — दलबदल कराकर उपचुनाव थोपने के आरोप और परिणामों से सरकार की साख व गठबंधन की स्थिरता प्रभावित।
  • कुमारवेल और सत्यभामा — एआईएडीएमके से इस्तीफा देकर टीवीके के टिकट पर फिर चुनाव लड़ रहे; उनका राजनीतिक भविष्य परिणाम पर निर्भर।
  • एआईएडीएमके — अपने जीते विधायकों के पाला बदलने के बाद दोनों सीटों पर नए उम्मीदवारों के साथ साख बचाने की चुनौती।
  • मदुरांतकम व धारापुरम के मतदाता — षणमुगम के अनुसार उन पर अनावश्यक चुनाव थोपा गया; उम्मीदवारों का विरोध कर रहे हैं।
  • फोरशोर एस्टेट के मछुआरे — प्रस्तावित सचिवालय-विधानसभा परिसर से उनके आवासीय इलाकों पर असर का आरोप।

क्यों अहम है

सत्तारूढ़ दल को बाहर से समर्थन देने वाला वाम दल जब उसी दल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे और दलबदल कराने का आरोप लगाए, तो यह गठबंधन राजनीति और विधायक दलबदल की नैतिकता दोनों पर सवाल उठाता है। सचिवालय परिसर, पीपीपी के जरिए सीवरेज निजीकरण और भ्रष्टाचार फाइलों पर मतभेद दिखाते हैं कि समर्थन शर्तों के साथ है। उपचुनाव के नतीजे तमिलनाडु में टीवीके सरकार और वाम दलों के रिश्ते की दिशा तय कर सकते हैं।

UPSC नज़रिया

प्रीलिम्स संकेत

  • मदुरांतकम और धारापुरम — तमिलनाडु की वे दो सीटें जहां विधायकों के इस्तीफे से उपचुनाव हुए।
  • पी षणमुगम — सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता जिन्होंने टीवीके पर आरोप लगाए।
  • जोसेफ विजय — टीवीके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री (स्रोत के अनुसार)।
  • 19 सितंबर — चेन्नई में फोरशोर एस्टेट सचिवालय-विधानसभा परिसर प्रस्ताव के विरुद्ध सीपीआई(एम) का प्रदर्शन।
  • पीपीपी मॉडल — मदुरै व नागरकोइल निगमों की भूमिगत सीवरेज परियोजनाओं के निजीकरण का विवादित तरीका।
  • आधव अर्जुना — लोक निर्माण व खेल मंत्री, जिन्होंने वाम दलों से डीएमके काल के भ्रष्टाचार पर बोलने को कहा।

मेन्स दृष्टिकोण

तमिलनाडु का यह प्रकरण गठबंधन राजनीति में \"बाहरी समर्थन\" के अंतर्विरोधों को उजागर करता है: सीपीआई(एम) टीवीके सरकार को बाहर से समर्थन दे रही है, पर उपचुनाव में अलग लड़ रही है और सत्तारूढ़ दल पर दलबदल के जरिए जनता पर चुनाव थोपने का आरोप लगा रही है। कारणों में जीत के बाद विधायकों का इस्तीफा देकर दूसरे दल में जाना और फिर उसी सीट पर नए टिकट से लड़ना शामिल है, जो प्रतिनिधित्व की वैधता, बार-बार चुनाव की लागत और मतदाता के जनादेश के सम्मान पर प्रश्न खड़ा करता है। नीतिगत मतभेद — मरीना के पास फोरशोर एस्टेट में सचिवालय-विधानसभा परिसर (मछुआरों पर असर व भीड़भाड़ का तर्क), पीपीपी से सीवरेज निजीकरण, और पूर्ववर्ती डीएमके सरकार पर भ्रष्टाचार की \"तीन फाइलें\" — दिखाते हैं कि समर्थन मुद्दा-आधारित बना हुआ है। आगे का रास्ता स्रोत में सुझाए अनुसार सीमित है: षणमुगम ने वैकल्पिक स्थलों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक और सीवरेज टेंडरों को रद्द करने की मांग की है, तथा सरकार से भ्रष्टाचार के कथित सबूतों पर कार्रवाई की अपेक्षा जताई है; साथ ही वाम दलों ने समर्थन वापसी का संकेत नहीं दिया है।

मुख्य शब्द

सीपीआई(एम)
वाम दल जो तमिलनाडु की टीवीके सरकार को बाहर से समर्थन दे रहा है, लेकिन कई मुद्दों पर उसकी आलोचना कर रहा है।
टीवीके
मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी (स्रोत के अनुसार)।
उपचुनाव (बायपोल)
किसी सीट के कार्यकाल के बीच खाली होने पर, जैसे विधायक के इस्तीफे पर, कराया जाने वाला चुनाव।
बाहरी समर्थन
सरकार में शामिल हुए बिना उसे विधायी समर्थन देना, जैसे वाम दल टीवीके सरकार को दे रहे हैं।
पीपीपी मॉडल
सार्वजनिक-निजी भागीदारी; यहां मदुरै व नागरकोइल में भूमिगत सीवरेज परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित, जिसका सीपीआई(एम) विरोध कर रही है।
फोरशोर एस्टेट
चेन्नई में मरीना तट के पास वह स्थान जहां नया सचिवालय-विधानसभा परिसर प्रस्तावित है और विरोध हो रहा है।

अभ्यास प्रश्न

  1. गठबंधन राजनीति में 'बाहरी समर्थन' की व्यवस्था सरकार की जवाबदेही को कैसे प्रभावित करती है? तमिलनाडु में सीपीआई(एम)-टीवीके संबंधों के आलोक में परीक्षण करें।
  2. जीत के तुरंत बाद विधायकों के इस्तीफे और दलबदल से होने वाले उपचुनाव लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और चुनावी लागत पर क्या प्रभाव डालते हैं? चर्चा करें।
  3. आवश्यक शहरी अधोसंरचना (जैसे सीवरेज और जलापूर्ति) के पीपीपी मॉडल से निजीकरण के पक्ष-विपक्ष के तर्कों का मूल्यांकन करें।

सिर्फ़ मूल ख़बर के आधार पर — आँकड़े और तारीख़ें स्रोत की हैं, अनुमान नहीं।

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