सबूत गढ़े नहीं जा सकते: सुप्रीम कोर्ट ने बरी किए जाने को बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने दोहरे हत्याकांड में एक महिला की बरी किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच अधिकारी का काम सबूत जुटाना है, गढ़ना नहीं। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने पाया कि टैक्सी चालक (पीडब्ल्यू-4) और होटल कर्मचारी (पीडब्ल्यू-18) गढ़े गए गवाह थे, क्योंकि जांच ने यह नहीं बताया कि उनके बयान क्यों, कब और किन परिस्थितियों में दर्ज हुए। मामला 2011 में हिमाचल प्रदेश के दियूर में एक महिला और उसके बेटे की हत्या से जुड़ा है। डीएनए बेमेल और अपूर्ण परिस्थितिजन्य कड़ी भी अभियोजन के खिलाफ रही। राज्य की अपील खारिज।